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बरसो इंद्र देवता ?

Posted On: 3 Jul, 2012 Others में

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सुख गये कुए , सुख गये तालाब
नहरों में पानी नही रहा
वाटर सप्लाई हुई बंद
पशु प्यासे , पक्षी प्यासे
प्यासा है दो हाथ , दो पैरो वाला इंसान
होठो पर आ रही पापड़ी
तन पसीने से तरबतर
सुखी है धरती सारी , कर रही त्राहिमाम
उस मजदूर पर रहम करो
जिसका होता सूरज से रोज टकराव
उस किसान पर रहम करो जो बैठा फसल की आस में
रहम करो उस व्यापारी पर
जो बैठा सुबह से शाम ग्राहक की आस में
बरसो इंद्र देवता, रहम करो अब आप
धरती कर रही त्राहिमाम और धरती पर रहने वाले भी कर रहे त्राहिमाम
बरसो इंद्र , हे बरसो इंद्र , अब तो बरसो इंद्र
इतना बरसो की गड्ढो में पानी भर जाए
नहरों में पानी आ जाए
तालाब पानी से लबालब हो
किसान खुशहाल हो
सबको मिले इस गर्मी से राहत
अब तो बरसो इंद्र , हे इंद्र अब तो बरसो

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Heloise के द्वारा
October 17, 2016

For the love of God, keep writing these arlietcs.

RAJHANS DEO के द्वारा
September 13, 2012

जब तक हिन्दू मांस, मुर्गा अंडा मछली खाना जरी रखेंगे तब तक देवता खुस नहीं होंगे – शर्म की बात तो ये है की अब ब्रह्मिन भी गो मांस खाने लगे – बेशरम हो गए सभी – पानी नही आग बरसेगा – और बरस भी रहा है.

akraktale के द्वारा
July 4, 2012

विकास जी नमस्कार, शायद आपकी पुकार इंद्र देवता ने सुन ली है और हमारे मालवा में बारीश कि धीमी मगर शुरुआत तो हो ही गयी है. आप पर भी इश्वर कि रहमत कि बुँदे शीघ्र ही बरसे ऐसी मेरी शुभकामना है. हे इन्द्र देवता जमकर बरसो करो धरती वासियों को निहाल, पोखर नहर सरिता बहें लबालब और सारे कृषक हों खुशहाल, मंगल गीत बजें घर घर में बनिया रहे सदा मालामाल, हे इन्द्र देवता जमकर बरसो करो धरती वासियों को निहाल.

    vikasmehta के द्वारा
    July 4, 2012

    ak रक्ताले जी नमस्कार ……….आपकी पंक्तिया बहुत ही सुंदर हैं और यदि मुझे ये पता होता की इंद्र मेरी पुकार सुनेंगे तो मै पहले ही उनसे विनती करता ! कल हमारे यहाँ भी काफी अच्छा मोसम रहा लेकिन वर्षा नही हुई चलिए आपके यहाँ हुई तो उसकी ठंडी हवा तो हम तक भी पहुची इसका हमें सब्र है


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