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इस्लाम का अपमान क्यों ?

Posted On: 13 Sep, 2012 Others में

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समय समय पर इस्लाम के अपमान से जुडी घटनाये सामने आती रहती हैं कभी अमरीकी पादरी टेरी जोन्स वर्ष 2010 में वर्ल्ड ट्रेड टावर पर हुए हमले की बरसी के मौके पर क़ुरान की प्रतियाँ जलाने की घोषणा करते हैं तो कभी अफगानिस्तान में अमरीकी सैनिक कुरान को जलाते हैं ! ताजा विवाद एक कथित ‘इस्लाम-विरोधी’ अमरीकी फिल्म के इंटरनेट पर आने के बाद है ! जिसके बाद लीबिया और अन्य इस्लामिक देशो में हिंसा का तांडव हो रहा है ! कई देशो में आगजनी दंगे हो रहे हैं ! यह सही है की किसी भी धर्म का अपमान गलत है और मुसलमानों को उसका विरोध करने का पूर्ण हक़ है जिसका वह इस्तेमाल कर रहे हैं ! जैसे बाकि धर्मो को सम्मान मिलना चाहिए वैसे ही इस्लाम को भी ! परन्तु बड़ा सवाल यह है की इस्लाम का अपमान बार बार क्यों होता है ? क्यों बार बार सभी गैर मुस्लिम ( काफिर ) मुसलमानों को अपने दुश्मन नजर आते हैं और खुद को अलग पाते हैं और बाकी सारी दुनिया एक तरफ ! आज की स्थिति बहुत हद्द तक यही है की इस्लाम को गाली देना मानो आतंक को गाली देना बन गया है जो इस्लाम का अपमान करता है वह पूरी दुनिया में हीरो बन जाता है ! चाहे वह टेरी जोन्स हो या अमेरिकी सैनिक या फिर सलमान रुश्दी ! लेकिन सवाल बार – बार रह – रह कर उभरता है इस्लाम का अपमान या इस्लाम के खिलाफ एक आवाज भी उस आम आदमी जिसे कल तक कोई जानता नही था हीरो बना देती है अथवा मसीहा तो क्या इसके पीछे छुपी इस्लाम की कट्टरपंथी सोच है या वे आतंकी जिन्होंने इस्लाम के नाम पर आतंक का खुनी खेल खेलकर भारत समेत सभी देशो की धरती पर मासूम लोगो का रक्त पिया है ! अन्यथा मुसलमानों की वह कट्टरपंथी सोच जिसके तहत गैर मुस्लिम उन्हें दुश्मन (काफिर ) नजर आता है ! विचार आम मुसलमान को करना है की आखिर आज इस्लाम अपमानित क्यों है ? विचार यह भी यह भी करना होगा की आज मयामार ,फ़्रांस , अमेरिका , चीन , जापान भारत में मुसलमानों को शक की नजर से क्यों देखा जाता है क्या इसके लिए आम मुसलमानों की वह भीड़ दोषी है जो बंगलादेशी घुस्पेठियो के लिए देश में जगह जगह दंगे पर उतारू हो जाती है अथवा वह भीड़ जो एक देश में रहते हुए वहा के क़ानून से उपर अपने धर्म मजहब को समझती है ? आम मुसलमान का विचार करना और समझना बेहद जरुरी है की आज वह कहा खड़ा है क्या एसे चोराहे पर जिसमे गैर मुस्लिम एक तरफ और मुस्लिम बीच चोराहे पर जिसके चारो और से गैर मुस्लिम उसे घेरे हुए है पर सबसे बड़ी बात क्यों ? why this sitution today for muslims

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chaatak के द्वारा
September 14, 2012

दिनेश जी के साथ पूर्ण सहमति, दिनेश जी, इतनी स्पष्ट रूप में बताने के लिए धन्यवाद! विकास जी शायद आपको अब कोई संदेह नहीं बचा होगा की इस्लाम क्यों चौराहे पर है| और ये भी स्पष्ट हो गया होगा कि उसे गैर मुस्लिमों ने नहीं तार्किक प्रश्नों और उसकी अपनी कमियों ने उसे घेर रखा है|

    vikasmehta के द्वारा
    September 14, 2012

    chatk ji isme koi do rae नही है की मुस्लिम समाज इस्लाम में छुपी कट्टरपंथ की भावनाओ की वजह से आज अलग थलग पड़ा है , दिनेश जी से मै भी सहमत हूँ मैंने भी वही कुछ लिखने का प्रयास किया लेकिन दिनेश jiवरिष्ठ लेखक हैं मै एक अदना छोटा सा ब्लोग्गर हूँ परन्तु मै केवल इतना चाहता हूँ की आम मुस्लिम समाज को अब विचार करना ही होगा की इस्लाम की कट्टरपंथी सोच उसे किस और ले जा रही है वह इस बात पर ध्यान दे महज ये कह देने से की इस्लाम में बुरे है या इस्लाम कैंसर है ये किसी बात का हल नही है यदि मुसलमानों को अपना भविष्य उज्ज्वल बनाना है तो इस्लाम की बुराइयों को दूर करने या मिटने पर जोर देना होगा

dineshaastik के द्वारा
September 14, 2012

जिस धर्म की बुनियाद हिंसा हो। उस धर्म का सम्मान कैसे हो। कत्ल की जो बात करता हो। वह खुदा भगवान कैसे हो। नारी की दयनीय दशा जिसमें, लूटना जिसकी ये हो फिदरत, कोई बतलाये खुदा का उस, मुझसे ये गुणगान कैसे हो। कृपया इसकी समीक्षा करें- धर्म न माने आपका, उसका कर दो कत्ल। हमें खुदा ने किसलिये, दी है ऐसी अक्ल?? पाप करो पाओ क्षमा, बढ़ेंगे निश्चित पाप। न्यायी कैसे बन गये, अरे खुदा जी आप।। पहिले भारी पाप कर, फिर ले माफी माँग। धर्म ग्रन्थ में है लिखा, खुदा करेगा माफ।। लेकर तेरे नाम को, शत्रु दुख, ले प्राण। नाम खुदा का कर रहे, वह पापी बदनाम।। दिल में मुहर लगाय के, पापी दिया बनाय। दोष नहीं कुछ जीव का, पापी खुदा कहाय।। जो उसके अनुयायी हैं, बस उसको उपदेश। मारो, काटो, लूट लो, दूजे मत के शेष।। क्षमा पाप से यदि करे, सब पापी बन जाय। इसीलिये संसार में बढ़ हुआ अन्याय।। करे प्रसंशा स्वयं की, वह कैसा भगवान। मुझको तो ऐसा लगे, खुदा में है अभिमान।। मेरे मत के लोग ही, जा पायेंगे स्वर्ग। दूजे मत के वास्ते, बना दिया क्यों नर्क? दूजे मत अनुयायी जो, काफिर देंय पुकार। ऐसे तो बन जायगा, काफिर यह संसार।। जिसको चाहे दे दया, जिसपर चाहे क्रोध। पक्षपात यदि जो करे, नहीं खुदा के योग्य।। मारा मेरे भक्त को, दोजख में दे डाल। मारे मेरे शत्रु को, स्वर्ग जाय, तत्काल।। दुष्ट हो अपने धर्म का, उसको मित्र बनाय। सज्जन दूजे धर्म का, उसके पास न जाय।। दूजे मत का इसलिये, उसको दिया डुबाय। जो उसके अनुयायी हैं, उसको पार कराय।। करवाये भगवान सब, पुण्य होय या पाप। फल क्यों न पाये खुदा, चाहे हो अपराध?? पक्षपात कहलायगा, फल यदि खुदा न पाय। क्षमा खुदा को यदि मिला, तो यह कैसा न्याय।। जिस फल से पापी बने, लगा दिया क्यों वृक्ष। जिसके खाने के लिये, बात नहीं स्पष्ट।। यदि स्वयं के वास्ते, तो कारण बतलाय। आदम से पहिले उसे, खुदा नहीं क्यों खाय।। बारह झरने थे झरे, शिला पे डण्डा मार। ऐसा होता अब नहीं, क्यों विकसित संसार?? निन्दित बंदर बनोगे, कहकर दिया डराय। झूठ और छल खुदा जी, आप कहाँ से पाय।। हुक्म दिया औ हो गया, कैसे हुआ बताय। किसको दिया था हुक्म ये, मेरी समझ न आय।। पाक स्थल जो बनाया, क्यों न प्रथम बनाय। प्रथम जरूरत नहीं क्या, या फिर सुधि न आय।। नहरें चलती स्वर्ग में, शुद्ध बीबियाँ पाय। इससे अच्छा स्वर्ग तो, पृथ्वी पर मिल जाय।। कैसे जन्मी बीबियाँ, स्वर्ग में, आप बताय। रात कयामत पूर्व ही, उन्हे था लिया बुलाय।। औ उनके खाविन्द क्यों, नहीं साथ में आय? नियम कयामत तोड़कर, किया है कैसा न्याय?? रहे सदा को बीबियाँ, पुरुष न रहे सदैव। खुदा हमारे प्रश्न का शीघ्र ही उत्तर देव?? मृत्य को जो जीवित करे, औ जीवित को मृत्य। मेरा यह है मानना, नहीं ईश्वरीय कृत्य।। किससे बोला था खुदा, किसको दिया सुनाय? बिना तर्क की बात को, कैसे माना जाय? खुदा न करते बात अब, कैसे करते पूर्व?? तर्कहीन बातें बता, हमको समझे मूर्ख।। हो जा कहा तो हो गया, पर कैसे बतलाय? क्योंकि पहिले था नहीं, कुछ भी खुदा सिवाय।। बिना तर्क की बात को, कैसे माना जाय?? तौबा से ईश्वर मिले, और छूटते पाप। इसी सोच की वजह से, बहुत बड़े अपराध।। ईश्वर वैदक है नहीं, यह सच लीजै मान। सच होता तो बोलिए, क्यों रोगी भगवान?? जड़ पृथ्वी, आकाश है, सुने न कोई बात। क्या ईश्वर अल्पज्ञ था, उसे नहीं था ज्ञात?? बही लिखे वह कर्म की, क्या है साहूकार? रोग भूल का क्या उसे, इस पर करें विचार?? आयु पूर्व हजार थी, अब क्यों है सौ साल? व्यर्थ किताबें धार्मिक, मेरा ऐसा ख्याल।। सच सच खुदा बताइये, क्यों जनमा शैतान? तेरी इच्छा के विरुध, क्यों बहकाया इंसान?? बात न माने आपकी, नहीं था तुमको ज्ञात। तुमने उस शैतान को, क्यों न किया समाप्त?? मुर्दे जीवित थे किये, अब क्यों न कर पाय? मुर्दे जीवित जो किये, पुनर्जन्म कहलाय।। कहीं कहे धीरे कहो, कहते कहीं पुकार। यकीं आपकी बात पर, करूँ मैं कौन प्रकार?? अपने नियम को तोड़ दे, मरे मैं डाले जान। लेय परीक्षा कर्म की, कैसा तूँ भगवान?? हमें चिताता है खुदा, काफिर देय डिगाय। कैसे ये बतला खुदा, तूँ सर्वज्ञ कहाय?? बिना दूत के क्या खुदा, हमें न देता ज्ञान? सर्वशक्ति, सर्वज्ञ वह, मैं कैसे लूँ मान?? बिना पुकारे न सुने, मैं लूँ बहरा मान। मन का जाने हाल न, कैसा तूँ भगवान?? व्यापक हो सकता नहीं, जो है आँख दिखाय। वह जादूगर मानिये, चमत्कार दिखलाय।। पहुँचाया इक देश में ईश्वर ने पैगाम। ईश्वर मानव की कृति लगता है इल्जाम।।

    vikasmehta के द्वारा
    September 14, 2012

    dinesh ji aapne jo bat kavita ke madhym se kahi uski har ek pankti saty hai prntu mahtvpoorn yah hai ki is trh ki kavitao bhashbno ko muslim samaj leta kis trh se hai mahtvpoorn yah hai ki vah samjhne ki bat n samjhkar us bheed ka hissa bankar rah jata hai jo bheed kuchek molviyo se chlti hai kya muslmano ko apne gyan chkshoo kholne ki jaruat nhi hai ?

akraktale के द्वारा
September 13, 2012

विचार आम मुसलमान को करना है की आखिर आज इस्लाम अपमानित क्यों है ? बिलकुल सही बात है यदि सामान्य मुस्लिम एक आतंकी का मजहब का होने के नाते साथ देता है तो उसे विचार करना होगा कि वह क्या कर रहा है.तभी मुस्लिमों कि छवि में सुधार होगा. बहुत सुन्दर आलेख विकास जी.

    vikasmehta के द्वारा
    September 14, 2012

    ak raktale ji mai ab tak jj par likh rahaa hoo uska sabse thos karn hai aap or dinesh ji ,saraswat ji aap log samy samy par meri hoslafjai karte hain sabse pahle uske lie dhnyvad

ashishgonda के द्वारा
September 13, 2012

मित्र! आपके प्रश्नों से बहुत हद तक सहमत हूँ,,,,परन्तु जो भी मुस्लिम विरोधी पोस्ट आती हैं वो उन मुस्लिमों के लिए है जो उसके लायक हैं, वरना… “हिंदू-मुस्लिम दो नयन भारत माँ की जान, नहीं एक के बिना दूजे की पहचान….” कुछ के कारण सभी को अपमान झेलना पड़ता है. मैंने कहीं सुना था कि, “कौम को गर्दिश-इ-अंजाम से बाहर कर दो, बेवफाई के हर इल्जाम से बाहर कर दो, बेगुनाहों का बहते लहू जो पागल, मुस्लिमों अपने इस्लाम से बाहर कर दो,,,,” सराहनिए प्रस्तुति..


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