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vikasmehta


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भारत में जाती जन्मजात से नही कर्म से थी

Posted On: 27 Apr, 2010  
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हेलो

Posted On: 26 Apr, 2010  
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असभ्यता , अश्लीलता पैर फैला रही है

Posted On: 26 Apr, 2010  
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असभ्यता , अश्लीलता पैर फैला रही है

Posted On: 26 Apr, 2010  
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फतवों और फरमानों का देश

Posted On: 23 Apr, 2010  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा:

विकास जी               नमस्कार, मीडिया का कार्य है ऐसी खबरें प्रसारित करना जिससे कि टीआर पी बढे और अधिकाधिक विज्ञापन मिले यदि आपने इस विषय पर लिखा मेरा आलेख पढ़ा होगा तो आपको ज्ञात ही होगा कि मैंने इन चेनलों को विज्ञापन चैनल ही कहा है क्योंकि इन चेनलों पर समाचार से अधिक समय तक विज्ञापन ही दिखलाये जाते हैं.खैर,                             अन्ना जी का कैमरे से बाहर होने का एक बड़ा कारण यह भी है कि वे अपनी बात पर अमल करते दिखाई नहीं दे रहे हैं क्योंकि उन्होंने घोषणा कि थी कि वे भारत भर में घूम कर जन जागृति का कार्य करेंगे किन्तु मुझे लगता है घूमना तो दूर शायद उनके कार्यक्रम कि रूपरेखा भी तैयार नहीं हुई है.                             चौथे स्तम्भ कि कार्यशैली अब प्रसिद्धि और धन कमाने पर आधारित है. सत्य या आम आदमी से उसका कुछ भी लेना देना नहीं है.

के द्वारा: akraktale akraktale

जिस धर्म की बुनियाद हिंसा हो। उस धर्म का सम्मान कैसे हो। कत्ल की जो बात करता हो। वह खुदा भगवान कैसे हो। नारी की दयनीय दशा जिसमें, लूटना जिसकी ये हो फिदरत, कोई बतलाये खुदा का उस, मुझसे ये गुणगान कैसे हो। कृपया इसकी समीक्षा करें- धर्म न माने आपका, उसका कर दो कत्ल। हमें खुदा ने किसलिये, दी है ऐसी अक्ल?? पाप करो पाओ क्षमा, बढ़ेंगे निश्चित पाप। न्यायी कैसे बन गये, अरे खुदा जी आप।। पहिले भारी पाप कर, फिर ले माफी माँग। धर्म ग्रन्थ में है लिखा, खुदा करेगा माफ।। लेकर तेरे नाम को, शत्रु दुख, ले प्राण। नाम खुदा का कर रहे, वह पापी बदनाम।। दिल में मुहर लगाय के, पापी दिया बनाय। दोष नहीं कुछ जीव का, पापी खुदा कहाय।। जो उसके अनुयायी हैं, बस उसको उपदेश। मारो, काटो, लूट लो, दूजे मत के शेष।। क्षमा पाप से यदि करे, सब पापी बन जाय। इसीलिये संसार में बढ़ हुआ अन्याय।। करे प्रसंशा स्वयं की, वह कैसा भगवान। मुझको तो ऐसा लगे, खुदा में है अभिमान।। मेरे मत के लोग ही, जा पायेंगे स्वर्ग। दूजे मत के वास्ते, बना दिया क्यों नर्क? दूजे मत अनुयायी जो, काफिर देंय पुकार। ऐसे तो बन जायगा, काफिर यह संसार।। जिसको चाहे दे दया, जिसपर चाहे क्रोध। पक्षपात यदि जो करे, नहीं खुदा के योग्य।। मारा मेरे भक्त को, दोजख में दे डाल। मारे मेरे शत्रु को, स्वर्ग जाय, तत्काल।। दुष्ट हो अपने धर्म का, उसको मित्र बनाय। सज्जन दूजे धर्म का, उसके पास न जाय।। दूजे मत का इसलिये, उसको दिया डुबाय। जो उसके अनुयायी हैं, उसको पार कराय।। करवाये भगवान सब, पुण्य होय या पाप। फल क्यों न पाये खुदा, चाहे हो अपराध?? पक्षपात कहलायगा, फल यदि खुदा न पाय। क्षमा खुदा को यदि मिला, तो यह कैसा न्याय।। जिस फल से पापी बने, लगा दिया क्यों वृक्ष। जिसके खाने के लिये, बात नहीं स्पष्ट।। यदि स्वयं के वास्ते, तो कारण बतलाय। आदम से पहिले उसे, खुदा नहीं क्यों खाय।। बारह झरने थे झरे, शिला पे डण्डा मार। ऐसा होता अब नहीं, क्यों विकसित संसार?? निन्दित बंदर बनोगे, कहकर दिया डराय। झूठ और छल खुदा जी, आप कहाँ से पाय।। हुक्म दिया औ हो गया, कैसे हुआ बताय। किसको दिया था हुक्म ये, मेरी समझ न आय।। पाक स्थल जो बनाया, क्यों न प्रथम बनाय। प्रथम जरूरत नहीं क्या, या फिर सुधि न आय।। नहरें चलती स्वर्ग में, शुद्ध बीबियाँ पाय। इससे अच्छा स्वर्ग तो, पृथ्वी पर मिल जाय।। कैसे जन्मी बीबियाँ, स्वर्ग में, आप बताय। रात कयामत पूर्व ही, उन्हे था लिया बुलाय।। औ उनके खाविन्द क्यों, नहीं साथ में आय? नियम कयामत तोड़कर, किया है कैसा न्याय?? रहे सदा को बीबियाँ, पुरुष न रहे सदैव। खुदा हमारे प्रश्न का शीघ्र ही उत्तर देव?? मृत्य को जो जीवित करे, औ जीवित को मृत्य। मेरा यह है मानना, नहीं ईश्वरीय कृत्य।। किससे बोला था खुदा, किसको दिया सुनाय? बिना तर्क की बात को, कैसे माना जाय? खुदा न करते बात अब, कैसे करते पूर्व?? तर्कहीन बातें बता, हमको समझे मूर्ख।। हो जा कहा तो हो गया, पर कैसे बतलाय? क्योंकि पहिले था नहीं, कुछ भी खुदा सिवाय।। बिना तर्क की बात को, कैसे माना जाय?? तौबा से ईश्वर मिले, और छूटते पाप। इसी सोच की वजह से, बहुत बड़े अपराध।। ईश्वर वैदक है नहीं, यह सच लीजै मान। सच होता तो बोलिए, क्यों रोगी भगवान?? जड़ पृथ्वी, आकाश है, सुने न कोई बात। क्या ईश्वर अल्पज्ञ था, उसे नहीं था ज्ञात?? बही लिखे वह कर्म की, क्या है साहूकार? रोग भूल का क्या उसे, इस पर करें विचार?? आयु पूर्व हजार थी, अब क्यों है सौ साल? व्यर्थ किताबें धार्मिक, मेरा ऐसा ख्याल।। सच सच खुदा बताइये, क्यों जनमा शैतान? तेरी इच्छा के विरुध, क्यों बहकाया इंसान?? बात न माने आपकी, नहीं था तुमको ज्ञात। तुमने उस शैतान को, क्यों न किया समाप्त?? मुर्दे जीवित थे किये, अब क्यों न कर पाय? मुर्दे जीवित जो किये, पुनर्जन्म कहलाय।। कहीं कहे धीरे कहो, कहते कहीं पुकार। यकीं आपकी बात पर, करूँ मैं कौन प्रकार?? अपने नियम को तोड़ दे, मरे मैं डाले जान। लेय परीक्षा कर्म की, कैसा तूँ भगवान?? हमें चिताता है खुदा, काफिर देय डिगाय। कैसे ये बतला खुदा, तूँ सर्वज्ञ कहाय?? बिना दूत के क्या खुदा, हमें न देता ज्ञान? सर्वशक्ति, सर्वज्ञ वह, मैं कैसे लूँ मान?? बिना पुकारे न सुने, मैं लूँ बहरा मान। मन का जाने हाल न, कैसा तूँ भगवान?? व्यापक हो सकता नहीं, जो है आँख दिखाय। वह जादूगर मानिये, चमत्कार दिखलाय।। पहुँचाया इक देश में ईश्वर ने पैगाम। ईश्वर मानव की कृति लगता है इल्जाम।।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

विकास जी, इस तरह के मिथ्या आरोप लगाने का क्या औचित्य। जिस तरह आप अन्ना जी एवं केजरीवाल जी पर आरोप लगा रहे हैं उसी तरह आप पर भी आरोप लगाया जा सकता है कि इस तरह  के आरोप लगाकर भ्रष्टाचार के मुद्दे को कमजोर करना चाहते हैं। क्षमा करना आपकी सोच अतार्किक एवं पूर्णतः दूषित है। मैं अन्ना जी और केजरीवाल का न तो भक्त हूँ और न समर्थक हूँ। हाँ उनके मुद्दे  का जरूर समर्थन करता हूँ। मुझे लगता है कि केजरीवाल की टीम ही व्यवस्था परिवर्तन के द्वारा भष्ट व्यवस्था से देश को मुक्ति दिला सकते हैं। इनके अतिरिक्त अन्य कोई भी व्यवस्था परिवर्तन की बात नहीं करता।  हाँ आदरणीय राजीव जी जरूर इस विषय में बात करते थे किन्तु राजनैतिक  महत्वकाँक्षा के कुचक्रों के कारण रहस्यमय ढंग से उनकी मृत्यु के साथ ही  व्यवस्था परिवर्तन की महिम मंद पड़ गई थी। आपको भ्रमित किया गया है। कृपया भ्रमित करने वाले संगठन के मुक्त होइये। और व्यवस्था परिवर्तन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दीजिये।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

विकास जी, सादर नमस्कार। मेरा मानना है कि बाबा रामदेव जी एवं अन्ना हजारे यानि टीम अन्ना के इरादे नेक हैं। तरीके एक हैं। रास्ते भी एक ही तरह के हैं। महात्वाकाँक्षायें भी एक हैं। किन्तु वर्तमान परिवेश में किसी आन्दोलन के सफल एवं अलफल होने का मापदण्ड  केवल भीड़ नहीं हो सकता। बल्कि आन्दोलन कारियों का उद्देश्य एवं समर्पण भाव होता है। जो दोंनो में है। आपका अन्ना टीम पर आरोप लगाना, निष्पक्षता एवं न्यायिक नहीं  कहा जा सकता। यह अन्ना के साथ नहीं अपितु जनता के साथ अन्याय होगा। इस  भष्टाचारी व्यवस्था को न तो अकेले रामदेव जी समाप्त कर सकते हैं और न ही अन्ना टीम। इन दोनों के अलावा पूर्व सेना अध्यक्ष जैसे ईमानदार लोंगो को भी संगठित होकर प्रयास करना होंगे। मुझे डर है कि केवल अपनी महात्वाकाँक्षाओं के चलते दोंनो, बाबा रामदेव एवं अन्ना टीम केवल काला धन एवं भ्रष्टाचार तक ही सिमिट सत्ता पर काविज होकर उसी भ्रष्ट व्यवस्था के अंग बन जायें। मैं देखता हूँ व्यवस्था परिवर्तन की जोरदार तरीके से कोई बात नहीं करता। दोंनो ही बड़े सुनियोजित तरीके से अपनी महात्वाकांक्षा  पूरी करना चाहते हैं। यह मेरा अपना विश्लेषण है, हो सकता है कि निराधार हो। हार्दिक इच्छा भी है कि यह निराधार ही हो। अपनी इस धारणा के बात भी मैं इन दोनों आन्दोलनों से जुडा हूँ और दोनों का नैतिक समर्थन भी करता हूँ।  

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

आमिर जी :- आपको पूरा देश सलाम करता है आपने बे जुबान हो चुके लोगो को जुबान दी जो अपने आपसे भी अपनी बात नही कर सकते थे उन्होंने पुरे देश,पूरे समाज के सामने अपनी बात रखी मैं दिल से सलाम करती हूँ उन सभी को , कितना मुश्किल होता है अपने दर्द,अपने राज किसी के सामने रखना !जिन्दगी बीत जाती लोगो को अपना दर्द बताने में कुछ तो ऐसे दर्द के साथ ही दुनिया से चले जाते है ! यह एक अछि पहल है समाज में जागरूकता की ,परन्तु इसका अस्तित्व बना रहे इसके लिए आपको इसके द्वारा कमाई गयी राशी को उन पीड़ित लोगो पर और समाज के हित के लिए खर्च किया जाए और उसका ब्यौरा टी ०वी० चेनल पर दिया जाये जिससे लोगो के मन में उठ रहे सवालों को जवाब मिले ! सुदेश पोसवाल

के द्वारा:

विकास जी नरेंदर मोदी धर्मनिरपेक्ष छवि बनाने में असफल हुए है ,दुसरे शब्दों में कह सकते उनके प्रयास इस मिथ को और तोड़ते से प्रतीत होते है , मै इसके लिए वंहा के दंगो , SIT की रिपोर्ट ,राहुल भट्ट के वक्तव्य ,और जाकिया जाफरी के हलफनामे को इसका आधार नहीं बनाना चाहता , ———- इसके लिए में समय समय पर सार्वजानिक मंचो पर उनके मुस्लिम विरोधी तहरीरे की तरफ ध्यान ले जाना चाहूंगा , उस दृश्य की तरफ आपका ध्यान खीचना चाहूँगा ,जब सद्भावना दिवस पर इक मुस्लिम इमाम की सद्भावना टोपी को उन्होंने अपने सर पर पहनने से इनकार कर दिया था , ——– देश को ऐसे नेता की जरुरत है ,जो सारे वर्णों ,धर्मो ,जातिओं को इकरूप में देखे ,

के द्वारा: चन्दन राय चन्दन राय

के द्वारा: akraktale akraktale

विकास जी हमारा प्रजातंत्र  अपराधियों एवं भ्रष्टाचारियों के कैद  में  हो चुका है। मुझे लगता है कि अब जनता को इनसे सत्ता छीनना पड़ेगी। अब तो पूरी राजनैतिक जमात भ्रष्टहो चुकी है। सारी पार्टियाँ जनता की नजर में अलग अलग हैं किन्तु भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सब एक हैं। गैर राजनैतिज्ञ को राष्ट्रपति न बनने देना इसका उदारहण है, सब पर्दे के पीछे खेल रहे हैं। भाजपा भी इस गैम में शामिल हो गई है। कमाल को कोई नहीं बनाना चाहता है राष्ट्रपति। एक ममता को छोड़कर। यह भी सच है कि ममता को छोड़कर सभी भ्रष्ट हैं। कोई दिखता है कोई दिखता नहीं है। सब पहिले से फिक्स था। डिम्पी यादवको निर्विरोध चुना जाना, राष्ट्रपति चुनाव की ही सौदेवाजी थी। इन नेताओं को डर था कि यदि कलाम जैसा कोई राष्ट्रपति बन जाता, तो कहीं भ्रष्टाचार विरोधी लोगों के हौसले न बढ़ जायं। और राष्ट्रपति से जनलोकपाल को बनाने का निर्देश न आ जाये। अब व्यवस्था परिवर्तन के लिये विशाल आन्दोलन तथा क्राँति की शुरुआत होनी चाहिये। राष्ट्रपति का चुनाव जनता द्वारा हो। राष्ट्रपति गैरराजनैतिक व्यक्ति हो। यह विधायक या सांसद अपने इलाके के वोटरों की 10 प्रतिशत जनता की बनी हुई समिति के अनुसार ही अपने मत का प्रयोग करे। मंत्रियों के स्वविवेक का अधिकार समाप्त हो। हर राजनैता के निर्णय पारदर्शी हों। नेता द्वारा जनता से किये गये वादों से फिरना देशद्रोह के समकक्ष माना जाय। चुनाव पूर्व किये गये वादे या घोषणा पत्र के विरुद्ध काम करने पर उस पार्टी की मान्यता रद्द कर दी जाय। स्विटजरलैण्ड की कानून बनाने की प्रक्रिया को अपनाया जाय। जाति या धर्म की बात करने वाले नेता को आजीवन प्रतिबंधित कर दिया जाय। अब तो बाबा जी और अन्ना जी जैसे लोगों को कलाम और पूर्व सेना अध्यक्ष आदि जितने भी ईमानदार लोग हैं को मिलाकर एक राजनैतिक दल बनाकर चुनाव लड़ना चाहिये। और विशाल बहुमत से जीतकर इस संसदीय व्यवस्था को बदल कर अध्याक्षात्मक प्रणाली को अपनाना चाहिये। जिससे प्रत्यक्ष प्रजातंत्र का निर्माण हो सके।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

विकास भाई अच्छा लिखा है । पहली बार आप की सराहना करता हुं । वरना हम तो टकराते ही रहते थे । गुजरात में केशुबापा जो कर रहा है वो खतरनाक खेल खेल रहा है । पटेल जाती गुजरात में सब से बडी जाती है । और उसे ही जातिवाद सिखा रहा है । मोदी जाति पटेल जाति से नीची मानी जाती थी । भले पटेल आज सुधर गये हों और कहता हो वो जातिवाद में नही मानते । पर मन के कोइ गहरे कोने में उंच नीच का भेद भाव मौजुद है । मोदी आप पर राज करता है शरम की बात है ये जताकर जनता के मन में दबा भेदभाव ही बाहर निकालता है । ये खरतनाक हरकत है । पटेलों को क्यों नही छेडना चाहिये ईस का मैं उदाहरण देता हुं । सुरत गुजरात की आर्थिक राजधानी और बहुत बडा शहर है । पटेल जाति के कारण ही सुरत के दो हिस्से बन गए हैं, प्रशासन की नजरसे । एक हिस्से में प्रशासन अपनी मनमानी कर सकता है, दुसरे हिस्से में दोबार सोचना पडता है । एक हिस्से में पूलिस नजर आयेगी दुसरे में नही । वहां जाने से पूलिस डरती है । गई तो भी शराफत से रहना पडता है वरना पूलिस की धुलाई हो जाती है । चोर भी वहां जाने से डरता है । जाने से पहले भागने का ईन्तजाम पहले करना पडता है । पकडे गये तो जान भी जा सकती है । पटेल पूलिस को नही बुलाते खुद मामला निपटाते है, निपटने के बाद ही पूलिस को बोलाते हैं । ट्राफिक पूलिस का तो सब से बूरा हाल होता है । ये जाती गुनाहित मानसिकतावाली बिलकुल नही है लेकिन एकता की ताकत से ट्राफिक के नियम तोडने जैसे गुनाह कर लेती है । ऐसे लोगों को जातिवाद में घसीटा जाता है ये केशुबापा की बहुत बडी भूल है । अशोक भाई विडंबना ये है की अच्छे या तथाकथित अच्छे लोग तलवार जैसे होते हैं । एक म्यान में नही रहना चाहते । सब को अपनी अपनी धार तेज करनी है । एक दुसरे की धार ही एक दुसरे को घायल करती है । कोंग्रेस में ईस बाबत की शान्ति है । एक ही तलवार है और उस तलवार से बाकी के कांप उठते हैं ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

यद्यपि तात्कालिक तौर पर तो यह संभव नहीं लगता कि कोई अपने जातीय आन्दोलनो के विरूद्ध खड़ा हो या फिर अन्तर्जातीय विवाह के लिए सहर्ष तैयार हो जाय,लेकिन वह दिन दूर नहीं,जब यह सब स्वयमेव होने लगे ।मेरा तो मानना है कि ऐसा होना प्रारम्भ भी हो गया है ।जैसे जैसे जागरूकता बढ़ती जा रही है,जातीय बंधन ढ़ीले होने लगे है,लेकिन वांछनीय स्थिति इससे भी प्राप्त नही होगी क्योकि साम्प्रदायिक मतभेदो तथा असमानताओ की स्थिति मे क्या होगा?पुनः यदि वह भी दूर होना मान लिया जाय,तो भी आई०ए०एस०,पी०सी०एस०,क्लर्क तथा चपरासी के व्यवहार भेद को कैसे दूर किया जाएगा ?मेरे बिचार से ऐसा होना कठिन है क्योंकि न तो कभी सभी की एक समान सोच हो सकेगी और न ही बिना सभी के समान सोच एवं व्यवहार के ऐसा संभव होना हो सकेगा ।विश्लेषक&याहू .इन ।

के द्वारा: vishleshak vishleshak

पियूष पन्त जी पहले आप उन लोगो के बारे में भी सोचिये जो लोग विरोध कर रहे हैं .........आज आप गोकुल में चले जाइए पुजारी कहेया की इतने रुपे दो आपके नाम की प्लेट लगा दूंगा और तो और छोटे छोटे बच्चे भी कहेंगे की ये फलाना टिका है इसे लगाने से ये होगा वो होगा और फट से आपसे रुपे मांगने लगेंगे ..........तो ये जो कृपा का व्यापर बाबाओ ने नही चलाया ये तो मंदिर के पूजारियो ने ही चलाया है उन्ही लोगो ने जिन्हें भारत के लोगो को भारतीय संस्कृति के ज्ञान से अवगत करना था उन्होंने मंदिरों को दूकान में तब्दील किया है फर्क सिर्फ इतना है मंदिर में बैठा पुजारी गरेब कहलाता है जब की तालकटोरा अथवा किसी और स्तेदिय में समागम या प्रोग्राम करने वाला बड़ा व्यापारी !

के द्वारा: vikasmehta vikasmehta

भाई विकास....... एक बात जो सबसे पहले कहने योग्य है वो ये है की किसी भी धर्म को सर्वाधिक क्षति किसी अन्य धर्म से नहीं होती अपितु अपने ही धर्म से होती है......... और यही निर्मल बाबा भी कर रहे थे..... इस लिए इनका विरोध जायज़ है..... गीता मे लिखा है की कर्म   करो फल की चिंता मत करो....... और हिन्दुत्व की धारणा भी यही है की कर्म सबसे ऊपर है........ पर निर्मल बाबा कहते है की समोसा खाओ लाल या हरी चटनी के साथ....... तो ये तो हिन्दुत्व के मूल आचरण पर आघात है........ अब जो लोग समोसा खा कर भी कृपा नहीं पा सकेंगे..... एक बार जिन लोगों को इस तरह शॉर्ट कट से कृपा पाने की आदत लग गई वो किसी अन्य धर्म से अच्छी कृपा के लोभ मे धर्म परिवर्तन करने से नहीं चूकेंगे....... कृपा का अर्थ है..... कृ + पा अर्थात कृ (कर कर्म कर) और पा (प्राप्त कर) ........ अब ये धर्म का अधर्म नहीं है तो क्या है..........

के द्वारा: Piyush Kumar Pant Piyush Kumar Pant

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: vikasmehta vikasmehta

के द्वारा: ajaydubeydeoria ajaydubeydeoria

भाई पहले मेरा अभिबदन स्वीकार करें | अगर आप ye kah रहें है की टीम अन्ना भाजपा के liye khatra बन सकती है लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं होगा | भाजपा की अपनी भूमिका है | अगर टीम अन्ना का इतना ही iffect होता तो खंडूरी जी हार नहीं jaate | अन्ना टीम ने सबसे ज्यादा गुडगान किया था | तो इस बात को दुमाग से निकल दें की टीम अन्ना से भाजपा को कोई नुकसान होगा | aapne अन्ना टीम के बारे में जो कहा वो sach है | की वो credit के liye aandolan कर रहें है | आप भाजपा प्रेमी है आछा लगा मई भी hun | और भाजपा ही देश में एक ऐसी पार्टी है जो देश को सही से चला सकती है | अब अगर आप भाजपा में ही jhak kar dekhten है तो इस टाइम कोई net ऐसा नहीं दिखाई देता जो भाजपा को चला सके देश को बांध सके | अगर कोई नेता है तो वो नरेन्द्र मोदी | लेकिन मोदी के aane से भाजपा sirf mushlim वोते khoyegi वो उसे वैसे भी नहीं मिलते है | लेकिन हिन्दू vote मिलेगा | अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस की हालत utnee ख़राब नहीं हो पायेगी जितनी होनी चाहिए | kyoki mushlim वोते sirf congres को hi मिलेगा | लेकिन jahan तक मेरा अनुमान है की २०१४ में लोकसभा की हालत dekhane लायक होगी कोई पूर्ण बहुमत में नहीं होगा तब teesre morche से इंकार नहीं किया जा सकता है |

के द्वारा: www.ashuyadav.in www.ashuyadav.in

अन्ना हजारे की टीम जिस तरह से बार बार अपने बयान देती है फिर पलट जाती है उससे उनका नुकसान हो न हो पर आम आदमी जो की इस भ्रस्ताचार की लड़ाई में उनका साथ दे रहा था वो जरुर ही परेसान हो रहा है । टीम अन्ना के सदस्यों को इस बात की चिंता कम दिख रही है की देश में लोकपाल कानून आये न आये परउनका पूरा उर्जा इस बात पर लग रहा है की कही गलती से किसी भी तरह इस आन्दोलन का श्रेय बाबा रामदेव या आर एस एस को न चला जाये।टीम अन्ना और बाबा रामदेव का तुलनात्मक अध्ययन करे तो निम्न बाते समझ में आती है जो कुल मिला कर अब तक बाबा रामदेव को ज्यादा विश्वसनीय साबित करती है।बाबा रामदेव मे जो स्पष्टवादिता और लक्ष्य के प्रति दृढता है वो टीम अन्ना मेँ नजर नही आती। टीम अन्ना कभी नेताओ का विरोध करती हैतो फिर उन्ही को अपने मँच पर आमँत्रित करती है,कभी काग्रेस का विरोध करने की हिम्मत दिखाती है तो कभी डर जाती है,कभी आर एस एस के लोगो को अपने भीङ मे स्वीकार करतेहै तो कभी उसका विरोध करती है,कभी रामदेव से सफाई माँगती है तो कभी उनको अपना सहयोगी बताती है,कभी चुनाव प्रचार मे उतरने की बात करती है तो कभी मना करती है। टीम अन्ना कई मामलों में पूर्ण रूप से सेकुलरिस्म का दिखावा करती नज़र आती है ।मौलाना शमीं काज़मी के विचार न मिलाने पर भी केवल दिखावा के लिए उन्हें अपने टीम में सामिल कर लिया जबकि उनकी टीम की एक युवा मुस्लिम सदस्य जहाँ एक तरफ कई बार सिमी का सपोर्ट करते हुए दिखी वही दूसरी तरफ आर एस एस को राष्ट्र विरोधी संस्था करार देती हुई टीवी पर आर एस एस से दुरी बनाकर चलने का विचार व्यक्त किया।टीम अन्ना में एक धुर ऐसा है जोकि राष्ट्रवादी विचार का पोषक है जिसका न्रेत्रित्व कुमार विश्वाश कर रहे है वही दूसरी तरफ रात के बामपंथियो (अघोसित) का नेतृत्व अरविन्द केजरीवाल कर रहे है और सबको पता है की बामपंथ किसी काम को करने से ज्यादा उस पर हो हल्ला मचाना ज्यादा पसंद करते है यही कारन है की अरविन्द केजरीवाल जो की इस समय इस टीम के अघोसित नेता है जो शोर तो बहुत मचा रहे है पर समस्या का हल नहीं चाहते है यही बात कुछ दिन पहले डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी ने भी कही है। आज तक टीम अन्ना हिन्दू धर्मगुरूओ का समर्थन प्राप्त करने की कोई जहमत नहीं उठाई पर न जाने क्या कारन है की इन्हें सही हो या गलत इसकी बिना परवाह किये हमेशा एक मुस्लिम धर्मगुरु की जरुरत महसूस हुई है।बाबा रामदेव के आन्दोलन में इस तरह का कोई नेतृत्व भ्रम नहीं दिखाई देता उनके विचार साफ़ है ।उन्होंने कभी भी किसी राष्ट्रहित के मुद्दे को हिन्दू मुस्लिम संघ संगठन या जाती के खानों में नहीं विभाजित किया उन्होंने मुद्दे के नाम पर सबको आमंत्रित किया जिसके कारन उनके समर्थको में कभी भ्रम की स्थिति पैदा नहीं हुई। ४ जून की रात को जो कुछ मुर्ख कांग्रेस्सियो ने उनके साथ किया उससे उनके समर्थको में उनके लिए और सहानुभूति पैदा हो गयी हलाकि उनके विरोधीओ को मज़ा लेने का मौका जरुर मिल गया की बाबा रामदेव डरपोक है पर ये विरोधो पहले भी उनके साथ नहीं थे और आज भी नहीं है अतः उनके ऊपर कोई फर्क नहीं पढ़ा जबकि टीम अन्ना ने जिसको की परोक्छ रूप में आर एस एस ने भीड़ जुटाने में मदद की थी बार बार उसका विरोध करके व्यर्थ की नाराज़गी मोल ले ली।जबकी बाबा रामदेव बड़े साफगोई से राष्ट्रहित के किसी भी मामले में किसी का भी समर्थन लेने की बात करके राजनितिक रूप से अपने आप का तथाकथित सेकुलर मीडिया से बचाव भी कर लिया और हिन्दू संगठनो को नाराज़ होने का कोई मौका भी नहीं दिया । बाबा रामदेव के विचार आज भी वही है जो साल भर पहले थे।अब टीम अन्ना को भी ये चाहिए की अपना विचार साफ रखे और बार बार बदले नही और विभिन्न सहयोगी जो की उसके आन्दोलन को धार दिए थे उनको पर्याप्त महत्व देना शुरू करे तभी जनता का पुराना विश्वाश फिर से लौटेगा _डॉ. भूपेंद्र

के द्वारा: drbhupendra drbhupendra

..आपने इस तरह के और मामले को नहीं उठाया ..भाजपा सदस्यों पर लगे आरोपों पर विधान सभा में देखे पोर्न विडियो के मामले में.... दोनों ही मामले में भाजपा सदस्य बरी हो चुके हैं... और ये अकल्मन्द कांग्रेसी फंस गया... अभी आपका ब्लॉग देखने से पहले मैंने भी वही विडियो डाउनलोड किया...देखकर पता चला गया.. अभिषेक मनु सिंघवी है...और ये बात सही बोली तेजिंदर खन्ना ने कि विभिन्न वेबसाइट में देश विरोधी इतना मैटेरिअल पड़ा है ..वो सब नहीं हटाया जाता वेबसाइट से ... और मनु सिंघवी की मक्कारी को हटा दिया जाये... और अगर अश्लीलता की भी बात करें तो बहुत अश्लील विडियो पड़े हैं वेबसाइट में... कोई इसको पोर्न मजा लेने के लिए नहीं देख रहा ..बल्कि अपने नेताओं की मक्कारी देख रहा है...देश... अब ये तकनिकी युग है... पोल खुल गयी टकले की.... कांग्रेस के नेता रशीद अल्वी कह रहे हैं.. ये पोर्न मामला अभिषेक मनु सिंघवी का निजी मामला है... हा हा हा ... खैर.. कपड़ों के अन्दर सब नंगे हैं... जो पकड़ा गया वही चोर है... कितना ब्लाक करेंगे इस विडियो को ...अभी और फैलेगा.... अब आपका ब्लॉग जो भी पढ़ेगा वो भी ढूँढेगा इस विडियो को... अगर उसको ना भी पता हो तो पहले तो अब पता चल जायेगा... धन्यवाद ये सब बताने के लिए....

के द्वारा: yogeshkumar yogeshkumar

महेता साहेब आपने बहुत सारी बातें एक साथ रख दी है । ईतना सारा काम ईन्सानों के बस का नही है । समय ही ये काम करता रहता है । और समय को तो अक्कल है नही । वो जो काम करता है वो हमारे फेवर में ही हो जरूरी नही । आपने धर्म के गर्व की बात कही । भला कोइ धर्म गर्विष्ठ कैसे हो सकता, जब की वो एन्सानों को नियंत्रित करने का चाबूक या लाठी मात्र हो । चाबूक को आप अच्छा मनोगे ? और गर्व शब्दमें ही अभिनान की बू आती है । नीति के अनुसार अभिमान बूरी चीज है । अभी आदमी जीस हाल में जी रहा है वो उस का रूटिन, आदत बन चुका है । अपना रूटिन तोडना आदमी के लिये मुश्किल होता है । आपने बाबाओं की बात कही । ये बाबाओं और धर्म का मूल काम था जन्गली जैसे आदमीयों को ईन्सान बनाना । लेकिन अब माजरा और है । आदमी ईन्सान के बदले भेंड-बकरी बन गया है । बाबा बोलता उधर जाओ तो चल पडता है उधर, बाबा बोलता है ईधर आओ तो चला आता है ईधर ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

के द्वारा: vikasmehta vikasmehta

के द्वारा: vikasmehta vikasmehta

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ढोंगी निर्मल बाबा से ऐसे निपटे- संता - "बाबा, मुझे रास्ता दिखाएँ मेरी शादी नहीं हो रही, बहुत चिंतित हूँ!" निर्मल बाबा - बेटा आप करते क्या हो?? संता - आप बताये शादी के लिए कौन सा काम उचित रहेगा?? ... निर्मल बाबा - तुम मिठाई की दूकान खोल लो! संता - बाबा वोह खोली हुई है, मेरे पिता की वोह दूकान है! निर्मल बाबा - शनिवार के दिन दूकान 9 बजे तक खोला करो! संता - शनी मंदिर के पास ही मेरी दूकान है जिस वजह से मैं देर रात तक दूकान खोला रहता हूँ! निर्मल बाबा - काले रंग के कुत्ते को मिठाई खिलाया करो! संता - मेरे घर में काले रंग का ही कुत्ता है जिसे मैं सुबह शाम मिठाई ही मिठाई खिलाता हूँ! निर्मल बाबा - सोमवार को शिव मंदिर जाया करो! संता - मैं केवल सोमवार नहीं, हर दिन शिव मंदिर जाता हूँ! निर्मल बाबा - भाई-बहन कितने है??? संता - बाबा, आपके हिसाब से शादी के लिए कितने भाई बहन होने चाहिए! निर्मल बाबा - दो भाई और एक बहन! संता - बाबा मेरे सच में दो भाई और एक बहन है! निर्मल बाबा - दान किया करो! संता - बाबा मैंने अनाथ-आश्रम खोल रखा है और उचित दान करता रहता हूँ! निर्मल बाबा - बद्रीनाथ कितनी बात गए हो? संता - बाबा, आपके हिसाब के शादी के लिए कितनी बार बद्रीनाथ जाना चाहिए??? निर्मल बाबा - कम से कम २ बार! संता - मैं भी दो बार ही गया हूँ! निर्मल बाबा - अच्छा, नीले रंग की शर्ट जाएदा पहना करो! संता - बाबा, पिछले चार साल से मैं नीले रंग की शर्ट पहन रहा हूँ कल ही धोले के लिए उतारी थी आज सूखते ही दुबारा पहन लूँगा, और कोई उपाए?? निर्मल बाबा - माँ-बाप की सेवा करते हूँ! संता - माँ बाप की इतनी सेवा की कि दोनों सीधे स्वर्ग चले गए!! बाबा एक सवाल पूछूं ?? निर्मल बाबा - हाँ, जरुर??? संता - बाबा, जरा ध्यान से देखिएगा कि मेरे माथे में सी लिखा हुया है??? निर्मल बाबा - नहीं! संता - तो बाबा, हो सकता है कि या तो आपके पास समय जाएदा है जो बैठ के लगे उल्लू बनाने या तो इन बैठे हुए सभी लोगो के पास पैसा ज्यादा है जो 3 - 3 हजार का टिकेट लेकर उल्लू बनने यहाँ आ गए?? वैसे एक बात और कह देता हूँ बाबा! निर्मल बाबा - हाँ क्या?? संता - मैं पहले से शादी शुदा हूँ और दो बच्चो का बाप भी! वोह तोह यहाँ से गुजर रहा था तोह सोचा थोडा टाइम पास आपसे करता चालू! हहाहहहहहाहा ...............

के द्वारा: poghal poghal

टीवी चैनलों पर रातों-रात प्रकट हुए एक चमत्कारी बाबा फर आजकल खूब चर्चा हो रही है। बाबा के भक्त उनके शिविर में कुछ इस तरह की प्रतिक्रिया दे रहा है- जेबकतरा : बाबा जी के चरणों में कोटि कोटि नमन! बाबा में पहले लोगों के जेब काटता था, तो 50 -100 रुपये ही मिलते थे! लेकिन अब आपका नाम लेकर जेब काटता हूँ, तो एक हज़ार से ऊपर की रकम मिलती है! जय हो बाबा की! शराबी (नशे के अंदाज़ में) : बाबा जी को प्रणाम! क्या बात है बाबा, आज एक ही कुर्सी पर आप जैसे दो-दो बाबा बैठे हैं ?? बाबा, पहले में दस बोतल भी पिता था तो भी नहीं चढ़ती थी! अब आपका बताया ब्रांड, आपका नाम लेकर पीता हूँ तो एक पैग में ही चढ़ जाती है! अभी तो सिर्फ आधा पैग ही पीकर आया हूं। जय बाबा की। बाबा जी आपके बगल में आपके भाई को भी जय बोलना। ... ... भक्त : बाबा आप सचमे चमत्कारी है बाबा! पहले बीबी मुझे डंडे से पीटती थी! जब आपका नाम लेता हूं, तो जूते से मारती है! बाबा, आपका नाम लेने से ही बड़े औजार (डंडा) छोटे औज़ार (जूता) में बदल गया। इसे और छोटा करो बाबा। अधिकारीः बाबा आप सच में महान ब्रांड हैं। पहले एक फाइल पास करने के लिए पांच सौ मुंह से मांगने पड़ते थे। जब से आपकी तस्वीर गांधी जी के बगल में लगाई है तब से बिना मांगे ही फाइल के अंदर से हजार निकलते हैं। बाबा आपकी शरण में आकर रिश्वत लेना भी पवित्र कार्य सा लगने लगा है, शाम को नोटों को गिनते वक्त अध्यात्म की अनुभूति होती है बाबा। बाबा, आपका हिस्सा पैकेट में रखकर पहुंचा दिया है। आप सच में चमत्कारी हैं।

के द्वारा: poghal poghal

कुछ और वाकये का जिक्र करना जरूरी समझ रहा हूं। बाबा कहते हैं कि पूजा में भावना होनी चाहिए, लेकिन जब बिहार की एक महिला को देखते ही उन्होंने कहाकि तुम छठ पूजा करती हो। वो बोली हां बाबा करती हूं, बाबा ने कहा कितने रुपये का सूप इस्तेमाल करती हो, वो बोली दस बारह रुपये का। बाबा ने कहा बताओ दस बारह रुपये के सूप से भला कृपा कैसे आएगी, तुम 30 रुपये का स...ूप इस्तेमाल करो। कृपा आनी शुरू हो जाएगी। बात यहीं खत्म नही हुई। एक महिला भक्त को उन्होंने पहले समागम में बताया था कि शिव मंदर में दर्शन करना और कुछ चढावा जरूर चढाना। अब दोबारा समागम में आई उस महिला ने कहा कि मैं मंदिर कई और चढावा भी चढाया, लेकिन मेरी दिक्कत दूर नहीं हुई। बाबा बोले कितना पैसा चढ़ाया, उसने कहा कि 10 रुपये, बाबा ने फिर हंसते हुए कहा कि दस रुपये में कृपा कहां मिलती है, अब की 40 रुपये चढाना देखना कृपा आनी शुरू हो जाएगी। अब देखिए इस महिला को बाबा ने ज्यादा पैसे चढाने का ज्ञान दिया, जबकि एक दूसरी महिला दिल्ली से उनके पास पहुंची, बाबा उसे देखते ही पहचान गए और पूछा शिव मंदिर में चढ़ावा चढ़ाया या नहीं। बोली हां बाबा चढा दिया। बाबा ने पूछा कितना चढ़ाया, वो बोली आपने 50 रुपये कहा था वो मैने चढ़ा दिया, और मंदिर परिसर में ही जो छोटे छोटे मंदिर थे, वहां दस पांच रुपये मैने चढ़ा दिया। बस बाबा को मौका मिल गया, बोले फिर कैसे कृपा आनी शुरू होगी, 50 कहा तो 50 ही चढ़ाना था ना, दूसरे मंदिर में क्यों चली गई। बस फिर जाओ.. और 50 ही चढ़ाना। क्या मुश्किल है, ज्यादा चढ़ा दो तो भी कृपा रुक जाती है, कम चढ़ाओ तो कृपा शुरू ही नहीं होती है। निर्मल बाबा ऐसा आप ही कर सकते हो, आपके चरणों में पूरे परिवार का कोटि कोटि प्रणाम। एक भक्त को बाबा ने भैरो बाबा का दर्शन करने को कहा। वो भक्त माता वैष्णों देवी पहुंचा और वहां देवी के दर्शन के बाद और ऊपर चढ़ाई करके बाबा भैरोनाथ का दर्शन कर आया। बाद में फिर बाबा के पास पहुंचा और बताया कि मैने भैरो बाबा के दर्शन कर लिए, लेकिन कृपा तो फिर भी शुरू नहीं हुई। बाबा ने पूछा कहां दर्शन किए, वो बोला माता वैष्णों देवी वाले भैरो बाबा का। बाबा ने कहा कि यही गड़बड़ है, तुम्हें तो दिल्ली वाले भैरो बाबा का दर्शन करना था। अब बताओ जिस बाबा ने कृपा रोक रखी है, उनके दर्शन ना करके, इधर उधर भटकते रहोगे तो कृपा कैसे चालू होगी। भक्त बेचारा खामोश हो गया। यहां मुझे एक कहानी याद आ रही है। एक आदमी बीबी से हर बात पर झगड़ा करता था। उसकी बीबी ने नाश्ते में एक दिन उबला अंडा दे दिया, तो पति ने बीबी को खूब गाली दी और कहा कि आमलेट खाने का मन था, और तुमने अंडे को उबाल दिया। अगले दिन बेचारी पत्नी ने अंडे का आमलेट बना दिया, तो फिर गाली सुनी। पति ने कहा आज तो उबला अंडा खाने का मन था। तुमने आमलेट बना दिया। तीसरे दिन बीबी ने सोचा एक अंडे को उबाल देती हूं और एक का आमलेट बना देती हू, इससे वो खुश हो जाएंगे। लेकिन नाश्ते के टेबिल पर बैठी पत्नी को उस दिन भी गाली सुननी पड़ी। पति बोला तुमसे कोई काम नहीं हो सकता, क्योंकि जिस अंडे को उबालना था, उसका तुमने आमलेट बना दिया और जिसका आमलेट बनाना था, उसे उबाल दिया। कहने का मतलब मैं नहीं समझाऊंगा। आप मुझे इतना बेवकूफ समझ रहे हैं क्या, कि निर्मल बाबा से सारे पंगे मैं ही लूंगा, कुछ चीजें आप अपने से भी तो समझ लो। बहरहाल दोस्तों तीसरी आंखे क्या क्या चीजें देखतीं है, मैं तो ज्यादा नहीं जानता। पर परेशान हाल आदमी से ये पूछा जाए कि आपने मटके का पानी कब पिया, भक्त कहे कि मटका तो बाबा मैने कब देखा याद ही नहीं, फिर बाबा बोले कि याद करो, भक्त कहता है कि हां कुछ याद आ रहा है कहीं प्याऊ पर रखा देखा था। बाबा कहते है कि हां यही बात मैं याद दिलाना चाहता था, आप प्याऊ पर एक मटका दान दे आओ और उस मटके पानी खुद भी पियो और दूसरों को भी पिलाओ। एक दूसरे भक्त को बाबा कहते हैं कि आप के सामने मुझे सांप क्यो दिखाई दे रहा है। भक्त घबरा गया, बोला बाबा सांप से तो मैं बहुत डरता हूं। बाबा बोले तुमने सांप कब देखा, भक्त ने कहा मुझे याद नहीं कब देखा। बाबा बोले याद करो, बहुत जोर डालने पर उसने कहा एक सपेरे के पास कुछ दिन पहले देखा था। बस बाबा को मिल गया हथियार, बोले कुछ पैसे दिए थे सपेरे को, भक्त ने कहा नहीं पैसे तो नहीं दिए। बस वहीं से कृपा रुक रही है। अगली बार सपेरे को देखो तो पैसे चढ़ा देना, कृपा आनी शुरू हो जाएगी। वैसे तो बाबा के किस्से खत्म होने वाले ही नहीं है, पर एक आखिरी किस्सा बताता हूं। एक भक्त को उन्होंने कहाकि आपके मन में बड़ी बड़ी इच्छाएं क्यों पैदा होती हैं ? बेचारा भक्त खामोश रहा। बाबा बोले आप कैसे चलते हो, साईकिल, बाइक या कार से। वो बोला बाइक से। इच्छा होती है ना बडी गाड़ी पर चलने की, उसने कहा हां, बस बाबा ने तपाक से कह दिया कि यही गलत इच्छा से कृपा रुकी है। आप बड़ी गाड़ी रास्ते पर देखना ही बंद कर दें। अब बताओ भाई कोई आदमी रास्ते पर है, अब बड़ी गाड़ी आ जाए तो बेचारा क्या करेगा। आंख तो बंद नहीं करेगा ना। इसीलिए कहता हूं कि मुझे तो लगता है कि बाबा के सामने मूर्खो की जमात लगती है । आप अगर उनके प्रश्न और सलाह सुन लें तो हँस-हँस कर लोटपोट हो जाएँ।

के द्वारा: poghal poghal

मित्र  आपकी अन्ना टीम  के संबंध  में शंकायें निराधार हैं। अफसोस  की आपके  अधिकांश  आलेख  तार्किक  नहीं होते, केवल  अन्ना टीम  का विरोध  करने  के उद्देश्य  से लिखे जाते हैं। सब जानते है कि बाबा रामदेव और अन्ना टीम  स्वच्छ  एवं स्वस्थ भारत  निर्माण  की कल्पना कर रहे हैं। मंजिल  एक  ही है, रास्ते  अलग  अलग  हैं। अन्ना का सामाजिक  एवं  राजनैतिक आन्दोलन  आन्दोलन  राजनैतिक  महत्वकांक्षा से प्रेरित  नहीं  है। जबकि  बाबा  रामदेव  जी  के बारे  में यह बात  आप  क्या बाबा रामदेव जी भी पूर्ण  दावे  से नहीं कह सकते हैं।     मेरी शंका  का निवारण  करेंगे  तो अत्यंत  खुशी होगी।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

अन्ना टीम में अधिकांशतः सामाजिक कार्यकर्ता हैं, राजनैतिक व्यक्ति नहीं हैं।  अन्ना टीम से जुड़े समर्थक आम आदमी है, चुनाव लड़ना उनके सामर्थ के बाहर है। अन्ना एवं उनकी टीम दलित उत्पीड़न के लिये कार्यरत हैं।  दहेज हत्या कानूनी मुद्दा है। इसके लिये कानून बने हुये हैं। कुछ सीमा तक इस पर नियंत्रण भी लगा हुआ है। धार्मिक डकैती का तात्यपर्य मैं समझ नही ंपाया। अन्ना टीम पर भ्रष्टाचार के आरोप सभी जानते हैं कि राजनैतिक साजिश हैं। फिर इसके लिये व्यवस्था  दोषी है, कोई व्यक्ति विशेष नहीं। हमें व्यवस्था बदलना है। सरकार नहीं। एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैं न तो अन्ना टीम का सदस्य हूँ और न ही समर्थक हूँ, बल्कि एक व्यवस्था से व्यथित भारतीय हूँ। ंमैं जाति प्रथा को एक कलंक के रूप में देखता हूँ।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

के द्वारा: Rajeev Gautam Rajeev Gautam

विकास मेहता जी, ये बदलाव अचानक नहीं बल्कि सोची समझी साजिश का हिस्सा है भाजपा और संघ के लोग जानते हैं कि अब देश कि जनता समझदार हो चुकी है राम के नाम पर वोट मिलने वाला नहीं है मुस्लमान.दलित.पिछारो का वोट मिलना नहीं है.केवल सवर्ण के वोट से कुछ हो नहीं सकता. ऐसे में अन्ना जी के पीछे से खेल हो रहा है और इसका मकसद है भाजपा कि सरकार बनाना और संघ के अनुसार देश को हिन्दू रास्त्र बनाना. चूँकि भ्रस्ताचर से पूरा देश परेसान है इसी कि आण में देश के लोगो को इकठ्ठा करके संसद और संबिधान को चुनौती दे रहें है. गुप्त रूप में सारे हिन्दू संगठनों को साथ लेकर इस आन्दोलन को चलाया जा रहा है.इसमें देश के पूजीपतियों का भी हाथ है.आखिर क्यों- ये लोग चुनाव नहीं लरते धार्मिक स्थल,ngo कार्पोरेट को लोकपाल में शामिल करते लेकिन देश कि जनता इनके मंसूबो को कामयाब नहीं होने देगी खंडूरी को हराकर मुलायम को जिताकर लोगों ने अपने इरादे स्पस्ट कर दिए हैं.

के द्वारा:

विकास जी नमस्कार ! पहली बात तो ये कि आपके लेख से सहमत नहीं हुआ जा सकता इसके लिए मैं माफ़ी चाहता हूँ ! मुझे ऐसा कोई कारण नज़र नहीं आता जिससे ऐसा लगे कि ये लोग कुछ गलत कर रहे हैं ! ये देश की और हमारी -तुम्हारी लड़ाई लड़ रहे हैं ! जहां तक मीडिया की बात है तो एक बात कह दूं , प्रधानमंत्री भी इतनी कवरेज नहीं ले पाते जीतनी कि एक अकेला अरविन्द केजरीवाल जी ले जाते हैं , अन्ना की तो बात ही क्या है ! सावधान जनता को इनसे नहीं बल्कि नेताओं से रहने की जरुरत है ! बहुत जल्दी आप देखेंगे कि या तो नेता सुधर ही जायेंगे वर्ना नंगे होकर सड़क पर भाग रहे होंगे और जनता उनके पीछे भाग रही होगी , वो अपनी इज्ज़त तो पहले ही खो चुके हैं !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: vikasmehta vikasmehta

के द्वारा: munish munish

के द्वारा: vikasmehta vikasmehta

के द्वारा: vikasmehta vikasmehta

विकास जी नमस्कार. आपके लेख वाकई देशप्रेम से ओतप्रोत होते है किन्तु कही न कही मुझे यह भी लगता है की आपके लेखो में साम्प्रदायिकता का रंग भी चढ़ा होता है. लेकिन बस मैं इतना ही कहना चाहूँगा की जात से बढकर देश, देश से बढकर दुनिया और दुनिया से बढकर इंसानियत. तो इंसानियत ही सबसे उच्च श्रेणी में आता है. फिर भी आपकी भावनाओं की मैं क़द्र करता हु उनमे देश और धर्म के लिए तो प्रेम है ही. और यह गुरु क्या चाहते है यह तो जग जाहिर है. बस कहने की हिम्मत नहीं है किसी में. पहली बार देखा बहुसंक्यक अल्प्संक्यक से भयभीत. लेकिन क्यों. आखिर अल्पसंख्यक कौन? सत्ता और अपने अहम् को सर्वोचता देने की भूख ही असल कारण है, इन सभी बातो की. http://singh.jagranjunction.com/2012/01/21/%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A3-%E0%A4%B9/

के द्वारा: Amar Singh Amar Singh

जो लोग बाबा रामदेव जी को गलत कह रहे है उन्हे शायद बाबा जी के बारे मे पूरी जानकारी नही है. रामदेव जी 2002 से देश के सेवा मे लगे है 2002 से 2011 तक का उनका ये सहर बोहोट कठिनाई वाला रहा. उन्होने बहुत पीड़ा झेली है. उन्हे बहुत कष्ट हुआ है. जो लोग बाबा रामदेव जी के बारे मे पूरी तरह नही जानते वो कृपा करके कुछ भी कॉमेंट ना करे. हमारी भ्रष्ट मीडिया पे कोई भी विश्वास ना करे. मीडिया बिकी हुई है. भारत मे जो भी न्यूज़ चॅनेल्स और अखबार चलते है वो सभी अमेरिका इंग्लेंड इटली और कुछ अरब देशों के इशारे से चल रहे है और ये खुलासा प्रूफ के साथ होने वाला है. अब जल्द ही भारत की जनता जो आँख पे पट्टी बाँध के सोई हुई है वो जाग जाएगी जब उन्हे पता लगेगा की भारत मे चलने वाले सभी न्यूज़ चॅनेल्स भारत के नही बलके विदेशी ताक़त से चल रहे है और वो देश हमारे भारत को पहले नंबर पे नही देखना चाहते और इसीलिए वो न्यूज़ चॅनेल्स, भ्रष्टा और बेईमान नेताओं और टीम अन्ना के साथ मिलकर बाबा रामदेव को बदनाम करने मे लगे हुए है.

के द्वारा:

के द्वारा: akraktale akraktale

आपके इस प्रशन पूछने पर बधाई है . परन्तु आप स्वतंत्रता के बाद के इतिहास का विश्लेषण करें या अंग्रेजों के काल का . अँगरेज़ कांग्रेस से डर कर मुसलमानों को बढ़ावा देने लगे , नेहरु गांधी तो अनेकों बार जेल गये पर जिन्ना ने तो हंस के लिया पाकिस्तान . हम पुरे भारत का प्रतिनिधित्व करने की चाहत का सपना देखने वाली कोंग्रेस के दिवासप्नों का शिकार हो गये.  संविधान के धर्मनिरपेक्षवाद की छद्म व्याख्या ने हमें न घर का छोड़ा न घाट का . अब तो सिर्फ पत्र पत्रिकाओं मैं इक्के दुक्के हिंदू संरक्षण की बात उठती है वास्तव मैं देश को खतरा बाघों के नहीं बल्कि हिंदुओं के लुप्त होने का है पर यदि नौजवान चाहे तो इसे बदल सकता है . पर देखना है जोर कितना बाजुए कातिल मैं है वाले नौजवान कहाँ रहे .

के द्वारा: rajivupadhyay rajivupadhyay

आदरणीय विकास जी सादर नमस्कार, मुझे आपके द्वारा अन्ना का विरोध करने का कोई आधार नजर नहीं आता। क्योंकि शायद आप न तो आप लालू है न मुलायम न ठाकरे न पवार न रामदेव। क्योंकि इनके विरोध का आधार है-राजनीति। मैं बड़े सम्मान के साथ आपसे कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूँ,यदि अनुमति हो तो पूछूँ- 1-क्या आप नहीं चाहते कि भारत भ्रष्टाचार मुक्त हो? 2-क्या आप नहीं चाहते कि चुनाव सुधार हो जिससे संसद में अपराधी न पहुँच सकें? 3-क्या आप नहीं चाहते कि चुनाव से पूर्व किये वादे को पूरा न करने पर जनप्रतिनिधि को वापस बुलाया जाय? 4-क्या आप नहीं चाहते कि राजनैतिक भ्रष्टाचार को देशद्रोह की श्रेणी में डाल दिया जाय? 5-क्या आप नहीं चाहते कि राजा कलमाड़ी से किये गये भ्रष्टाचार से दुगनी वसूली की जाय? 6-क्या आप नहीं चाहते कि जनता अपने अधिकारों कि प्रति जागरूप हो? 7-क्या आप नहीं चाहते कि अपराधियों की जगह जेल में हो,संसद में नहीं? कृपया मेरे प्रश्नों को अन्यथा न लेकर तार्किक उत्तर देने की कृपा करें। आपका आभार व्यक्त करूँगा।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

विकास जी, आप निष्कर्ष पर बहुत जल्दी पहुँच जाते हैं, मैं तो भगवान् की भक्ति में भी समय नहीं देता तो अन्नाजी अथवा रामदेवजी की क्या भक्ति करूंगा, परन्तु, किसी भी कार्य को सकारात्मक सोच के साथ समझने की कोशिश जरूर करता हूँ...... जीवन रुपी विद्यालय का एक छात्र........एक बार इसी मंच पर एक ब्लोगर नेरामदेवजी के आन्दोलन के विरोध में लिखा था और आप ही की तरह मैंने उनको भी जवाब दिए परन्तु उन महाशय से जवाब देते नहीं बना और वो भी दिए गए तर्कों पर बात करने से कतरा गए ( आप ही की तरह)....... और अब तो उन्होंने मंच पर आना भी बंद कर दिया..... आपके लिए खुशखबरी है ...... टीम अन्ना ने आन्दोलन को आगे किस तरह बढ़ाना है इस विषय में जनता से विचार मांगे हैं...... अब आप उनको अपनी नेक सलाह दे सकते हैं..... आपके पास अच्छा मौका है अन्नाजी की गलतियों को सुधारने का और कहीं जनता की समझ में आपकी कार्यपद्धति आ गयी तो आप भी हीरो तो बन जायेंगे ( महात्मा बनाने से तो आप भी परहेज़ करेंगे )

के द्वारा: munish munish

विकास जी, आपने लेख लिखने में बहुत मेहनत की है इसलिए आप बधाई के पात्र हैं कभी कभी आपके लेख पढ़कर लगता है की आप भ्रष्टाचार के खिलाफ चलने वाले आन्दोलनों के खिलाफ हैं. या फिर अन्ना के .......? यदि आपको लगता है की अन्ना कुछ गलत कर रहे हैं तो आप उसको सही कीजिये और उतरिये मैदान में, यकीन मानिए ये ऐसा मुद्दा है आपको भी व्यापक जनसमर्थन मिल ही जाएगा....! ये केकड़ा प्रवर्ती गलत है की एक दुसरे की टांग खींचते रहो . क्यों नहीं हम लोग राष्ट्रीय समस्याओं के विरोध में एक साथ खड़े हो सकते..... ! ऐसे समय में जबकि आपको अपनी लखनी से भ्रष्टाचार समर्थकों की खिंचाई करनी चाहिए, आप उनकी ही खिंचाई कर रहे हैं जो इसके विरुद्ध आवाज़ उठा रहे हैं......! जिस विषय को लेकर अन्ना ने अनशन किया वो एक गंभीर विषय है और वो कितने सफल हुए ये उनको मिले व्यापक जनसमर्थन से पता चल जाता है.... आदमी अपने कर्मों के द्वारा जाना जाता है अब ये तो जनता की इच्छा है वो उसको महात्मा माने, भगवान् माने, या इंसान. जैसे महाभारत में जो लोग कर्म के अच्छे या बुरे प्रभाव का विश्लेषण करते रहे वो ही युद्ध के कारक बने और जिन्होंने केवल कर्म को महत्त्व दिया वो भगवान्. मेरा मानना है की जब तक आप अपना शत प्रतिशत किसी काम को नहीं देते तब तक सफलता में संदेह है और तबियत खराब होने पर शत प्रतिशत दे पाना संभव नहीं जान पड़ता. किसी भी आन्दोलन को सफल बनाने के लिए बहुत से कारक होते हैं केवल एक नहीं " अनशन केवल एक माध्यम है अपनी बात जनता तक और सरकार तक पहुंचाने का तरीका है .... जैसे भगत सिंह ने संसद में बम फेंका जबकि उस बम से कोई नुक्सान नहीं हुआ लेकिन वो अपनी बात हुक्मरानों तक पहुंचाने में सफल रहे एक तो महाराष्ट्र सरकार ने अनशन के लिए स्थान ही दो तीन दिन के लिए दिया था ....... दूसरा इस बार अनशन से पूर्व ही उसकी अवधि बता दी गयी थी और वो एक तरह से सांकेतिक था, और हर व्यक्ति की अपनी सामर्थ्य प्रभाव होता है केजरीवाल और बेदी, अच्छे रणनीतिकार हो सकते हैं लेकिन उनके कृत्य का प्रभाव अभी जनता पर उतना नहीं पद सकता जितना की अन्ना का, इसलिए केजरीवाल और बेदी द्वारा अनशन को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं था. १९२१, में असहयोग आन्दोलन अपने चरम पर था देश का माहौल बिलकुल बदल चूका था और लगता था की आज़ादी बस कुछ ही दिनों की बात है तभी चौरी चौरा में एक अहिंसात्मक घटना हुई, पूरे देश में एक छोटी सी अहिंसात्मक घटना, और गांधी जी ने आन्दोलन को यह कह कर रद्द कर दिया की देश अभी अहिंसात्मक आन्दोलनों के लिए तैयार नहीं है, और उन्होंने आन्दोलन रद्ध कर दुबारा से रणनीति पर विचार किया, और जहां तक मुझे याद है अन्ना टीम ने भी दुबारा रणनीति बनाने की बात कही है शायद आपको अपने सवालों के जवाब मिल गए हों....... यदि आप सकारात्मक सोचेंगे तो सब कुछ समझ में आएगा और केवल नकारात्मक भाव लेकर ....... केकड़ों की भाँती टांग ही खींचनी है तो बात अलग है

के द्वारा: munish munish

विकाश मेहताजी, मुझे शक है की आपका दिमाग तो सही है. आप क्या कहना चाहते हैं. किसने कहा आपको की अन्ना देश को दूसरी आज़ादी दिया रहे हैं . अगर मीडिया अन्ना को महत्त्व दे रही है तो आपके पेट में दर्द क्यों हो रहा है. मीडिया तो मीडिया है, जो करती है सोच समझ कर ही करती है. सुब्रमनियम स्वामी और अन्नाजी के बीच तुलना करने की क्या तुक है.दोनों अपनी-अपनी जगह देश के लिए काम कर रहे हैं. जब कोई लडाई में जाता है तो जीत हार दोनों का ही सामना करना पड़ सकता है. आपने देश को आजाद कराने की बात तो बार बार लिखी परन्तु "भ्रष्टाचार" शब्द का ज़िक्र एक बार भी नहीं आया. चलो आपकी राय में "हम गुलामों" को तो आज़ादी का नारा काफी है वाला जुमला मान भी लें तो भी यह नारा लगाने के लिए भी जज्बा चाहिए सो आप जैसों में नहीं है पर अन्ना में तो कूट-कूट कर भरा है. कहीं आप उस जमात से तो नहीं है जो कुर्सी पर बैठ कर रोज जनता से घूंस लेते रहते हैं.

के द्वारा:

विकास जी मुझे लगता है की अब आप को ही आन्दोलन करना चाहिए…. क्यूंकि अगर कोई और करेगा तो आप उस पर प्रश्न ही उठाते रहेंगे…. जवाब ढूँढिये….. प्रश्न खडा करना आसान है….. इस पर एक कहानी यहाँ पर देना चाहूँगा…. एक चित्रकार ने एकबार एक पेंटिंग बनायीं और उसे चौराहे पर टांग दिया और उस पर लिख दिया की इस पर गलती बताओ…. शाम तक उसकी पेंटिंग पर लोगों ने हज़ारों गलतियाँ बता दी…. अगले दिन उसने वाही पेंटिंग दुबारा टांग दी और उस पर लिख दिया जहाँ गलती हो ठीक कर दो…. तो एक भी व्यक्ति ने उस पर कुछ न किया….. ऐसा ही हम लोग भी कर रहे हैं… जो प्रयास करता है उस पर प्रश्न उठाते हैं और स्वयं करने के नाम पर बगलें झांकते है….

के द्वारा: HIMANSHU BHATT HIMANSHU BHATT

गरीबदास जी और विकास जी मुझे लगता है की अब आप को ही आन्दोलन करना चाहिए.... क्यूंकि अगर कोई और करेगा तो आप उस पर प्रश्न ही उठाते रहेंगे.... जवाब ढूँढिये..... प्रश्न खडा करना आसान है..... इस पर एक कहानी यहाँ पर देना चाहूँगा.... एक चित्रकार ने एकबार एक पेंटिंग बनायीं और उसे चौराहे पर टांग दिया और उस पर लिख दिया की इस पर गलती बताओ.... शाम तक उसकी पेंटिंग पर लोगों ने हज़ारों गलतियाँ बता दी.... अगले दिन उसने वाही पेंटिंग दुबारा टांग दी और उस पर लिख दिया जहाँ गलती हो ठीक कर दो.... तो एक भी व्यक्ति ने उस पर कुछ न किया..... ऐसा ही हम लोग भी कर रहे हैं... जो प्रयास करता है उस पर प्रश्न उठाते हैं और स्वयं करने के नाम पर बगलें झांकते है....

के द्वारा: HIMANSHU BHATT HIMANSHU BHATT

पियूष जी ........अण्णा हजारे के बारह दिवसीय अनशन से पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जिस तरह का जनांदोलन खड़ा हुआ उसके लिए अण्णा हजारे साधूवाद के पात्र हैं। चूंकि अण्णा हजारे को ‘दूसरा गांधी’ करार दिया जा रहा है और महात्मा गांधी किसी भी आंदोलन के लक्ष्य के साथ-साथ उसके साधन के प्रति विशेष आग्रह रखते थे, इसलिए यह सवाल सहज-स्वाभाविक है। महात्मा गांधी ने अपने जीवन काल में कुल 30 बार अनशन किए। इसमें एक तिहाई अनशन उन्होंने आत्मशुद्धि के लिए, एक तिहाई अनशन अपने आंदोलन के साथियों के दोष निवारणार्थ और केवल एक तिहाई अनशन साम्राज्यवादी शक्ति के खिलाफ किए थे। जब कोई महात्मा गांधी के वैचारिक साए में किसी भी प्रकार का आंदोलन करेगा तो उसे गांधी की रीतियो-नीतियों के मापदंड पर कसा जाएगा। गांधीवादी की मामूली समझ रखनेवाला भी आसानी से बता देगा कि क्या कोई ओमपुरी शराब के नशे में धुत होकर महात्मा गांधी के मंच से सांसदों के लिए अपशब्दों का प्रयोग कर सकता था? महात्मा गांधी तत्काल अपना आंदोलन स्थगित कर देते। अण्णा हजारे के 12 दिवसीय आंदोलन का अगर ईमानदारी से परीक्षण किया जाए तो ऐसे तमाम सवाल खड़े होते हैं जो ‘टीम अण्णा’ के इरादों को संदिग्ध साबित करते हैं।

के द्वारा: vikasmehta vikasmehta

विकास जी .... आपके हर प्रश्न का मैं जवाब दे रहा हूँ..... पर आपके किसी भी उत्तर मे गुणवत्ता नहीं है.... अपितु कुछ और सवालों की गुंजाइश है... आपने ओबामा द्वारा अन्ना की प्रसंसा पर कुछ अटपटा सा जवाब दिया पर मोहन भगवत द्वारा प्रसंसा करने के कारण को आप छुपा गए.... यदि ये आंदोलन विदेशी है तो क्यों नहीं आडवाणी जी ने इस का विरोध किया..... आडवाणी जी को निशाने पर लेने को आप मीडिया से प्रभावित हो जाना कहते हैं...... तो अन्ना के खिलाफ आप इन आकड़ों को प्रयोग कर रहे हैं...... ये बात भी मीडिया ही प्रचारित कर रहा है.... आपके हिसाब से ये अच्छा है की हम अपनी योजनाओं के लिए (जिनसे ये नेता पैसा बनाते हैं) विश्व बैंक से पैसा लें पर जब बात राष्ट्र के निर्माण की हो तो हम विरोध करने पर आमादा हो जाएँ..... एक गांधीवादी नेता से आपको मराठी मुद्दे पर बोलने की उम्मीद है पर उस व्यक्ति से नहीं जो प्रधानमंत्री पद के लिए दौड़ रहा है... जहां तक बाबा रामदेव के आंदोलन का प्रश्न है तो उस आंदोलन को सबसे अधिक नुकसान आप जैसे लोग ही पहुंचा रहे हैं....... जिनहोने जनता को दो भागों मे बात दिया है...... अन्ना समर्थक और बाबा समर्थक..... अफसोस कोई राष्ट्र समर्थक दूर दूर तक नहीं दिख रहा है..... मैं खुले हृदय से कहता हूँ....... की मैं जितनी श्रद्धा से अन्ना हज़ारे के आंदोलन मे हूँ.... उतनी ही श्रद्धा से बाबा रामदेव के साथ और श्री श्री रविशंकर के साथ भी..... कल को आप खुद ही राष्ट्र हित मे कोई आंदोलन करने की बात करें तो मैं सबसे पहले आपके साथ हुंगा....... जब तक हम राष्ट्र हित को चेहरों के साथ मिलाते रहेंगे..... .देश का कुछ भला नहीं होगा......

के द्वारा: Piyush Pant, Haldwani Piyush Pant, Haldwani

प्रिय विकास भाई जी ,.सादर नमस्कार सोचा था ,.प्रतिक्रिया नहीं दे सकूंगा ,..लेकिन दे ही देता हूँ ,..... मैं भी ४ अप्रैल से हुए आन्दोलन में अपने शहर में सबसे पहले पहुंचा था,.शुरू में कुल मिलाकर आठ दस लोग ही थे ,..जो IAC का coordinatar था उसको भी नहीं पता था ,..कल शहर में क्या होगा ....दूसरे तीसरे दिन से लोग ज्यादा जुटने लगे मिडिया का योगदान सबसे ज्यादा मानता हूँ ,..छपास ऐसी बीमारी है जिसके वशीभूत होकर भीषण भ्रष्टाचारी भी नए कुर्ते डालकर मोमबत्ती पकड़ भ्रष्टाचार ख़त्म करने में अपना सर्वस्व दांव पर लगाने का दावा करने लगे ,..लेकिन इससे मुझे या अन्य साथी युवाओं को कोई फर्क नहीं पड़ा ...क्योंकि हमने मुद्दा महत्वपूर्ण समझा था .. अग्निवेश और भूषण संस पर शुरू से हमें अविश्वास था ,........लेकिन मुख्या मुद्दे के सामने बाकी सारी बातें गौण ही लगी ..... आपकी बातों से मुझे लगता है ,..आप आडवानी और बाबा रामदेव के अनन्य भक्त हैं ,...बाबा रामदेव का मैं तहेदिल से सम्मान करता हूँ ,..करता रहूँगा,..देश के लिए उनके त्याग ,परिश्रम को मैं प्रणाम करता हूँ ... ...आडवानी को सम्मान दे पाना मेरे वश से बाहर है ,.. टीम अन्ना पर उठ रहे सवाल कुछ मेरे भी हैं ,..लेकिन इन सवालों का सामयिक औचित्य नहीं लगता है ,..आप यह क्यों भूल जाते हैं की अन्नाजी एक सच्चे देशभक्त समाजसेवी हैं ,..आजीवन स्वदेशी के पैरोकार क्या विदेशिओं के हाथों में खेल सकते हैं ?.....व्यस्थापरिवर्तन का बिगुल बाबा रामदेव ने बजाया है ,..अन्नाजी उनके साथी हैं ,....यह कोई महीने में निपटने वाला आयोजन नहीं है ...संघर्ष में समय लगेगा ....हिन्दुस्तान की जनता सबसे ऊपर से लेकर सबसे नीचे तक टुकड़ों में बंटी है.....लगातार लड़ते रहना होगा ,...अन्ना -बाबा के चक्कर में आप असली दुश्मन को क्यों भूल जाते हैं ,.. .मेरी एक विनम्र सलाह है आपको,.. आप सबकी गलतियाँ जरूर देखें लेकिन समझदारी के साथ ,.....खूंखार बिल्ली तो यही चाहेगी कि बन्दर लड़ते रहें ,...जरूरत सभी बंदरों को इकठ्ठा होकर बिल्ली को भागने की है ,.. आभार सहित आपको हार्दिक शुभकामनाये

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

पियूष जी.....मै समझता हूँ की किसी विदेशी आन्दोलन से बेहतर है की मै किसी देसी नेता या बाबा की चमचागिरी करू चुकी मुझे विदेशी जुटे साफ़ करना अच्छा नही लगता और न ही उनके इशारो पर नाचना . मै समझता हूँ की किसी इसे आन्दोलन में सहयोग देने सेबेह्त्र है की मै किसी इसे आन्दोलन का हिस्सा बनू जो की भारत की जनता के दम पर और भारतीय नेत्रित्व में लड़ा जाए न की किसी पश्चिमी मुल्क की रहमो कर्म पर . १ आप जो ओबामा की बात कर रहे है तो सुनिए बाबा रामदेव का जो आन्दोलन था और है बह पूरी की पूरी वयवस्था को बदलने का है एक बात ........और अन्ना का आन्दोलन शुरू होते ही ये मुद्दे सव्देशी शिक्षा ,चिकित्सा , काला धन गायब से हो गये अब समझे की ओबामा को इसमें क्या अच्छा दिखा ? २ ये जो बार - बार आडवानी जी को आप लोग निशाने पर लेते है न उसका जवाब आपको खुद में तलाशना होगा चुकी आप लोग मिडिया की दिखाई हुई बातो से भुत ज्यादा प्रभावित होते है ३ देखी मेरे कसबे में शायद पहला शख्स मै ही था जो अन्ना के आन्दोलन में सबसे पहले झंडा लेकर खड़ा हुआ और तम्बू में लगाने के लिए पंखे का भी इंतेज़ाम किया लेकिन उनके विरोध में अब भी नही हूँ मै लेकिन उनकी बयानबाजियो और अमेरिका आधारित आन्दोलन की खिलाफत में हूँ मै . ४ देखिये आडवाणी जी एक नेता है उनकी सहयोगी पार्टी क्या बोलती है क्या नही वे बस अपना काम करते है यकीन कोई इंसान यदि ये कहे की मै गांधीवादी हूँ तो उससे उम्मीदे बढती है . ६ आपका पांच नम्बर का उत्तर समझ में नही आया है इसलिए ६ नम्बर पर आते है आप मुझे एक बात बताइए क्या बाबा रामदेव का आन्दोलन देशहित में नही था ? जब अन्ना का आन्दोलन हुआ तो यूथ ब्रिगेड सडको पर और जब बाबा का आन्दोलन हुआ था तब कहा थी ?

के द्वारा:

भाई गरीबदास जी..... ये हमारा दुर्भाग्य है की यहाँ सकारात्मक पहल पर प्रश्न उठाने के लिए हजारों खड़े हैं.... पर यदि उनको कुछ सुझाव देने को कहा जाए तो वो मूक हो जाते हैं...... आप क्यों नहीं कोई ऐसा सुझाव दें जिसके आगे लोकपाल छोटा लगने लगे..... कोई कानून कोई समाधान जो भ्रष्टों को समाप्त कर सके.......... एक और आप कहते हैं की देश, समाज में स्वच्छता आये इसका कोई विरोध नहीं कर सकता और अगर कोई विरोध करता है तो वह पापी है और आप खुद ही पाप कर रहे है.... यहाँ कोई किसी का अंध भक्त नहीं है... सिवाय कुछ उन लोगों के जो किसी राजनीतिक दल या राजनीतिक व्यक्तित्व के प्रति निष्ठा की भावना से भरे हैं.... इस देश की जनता ने अन्ना का समर्थन किसी की अंधभक्ति मे नहीं किया.... अन्ना के रूप मे उन्हे एक ईमानदार नेतृत्व दिखा.... जनलोकपाल के महत्व को टीम अन्ना ने लोगो तक पहुंचाया..... लोगों के लिए लोकपाल मुख्य विषय है...... अन्ना नहीं.... हर भारतीय का स्वप्न सिविल परीक्षा उत्तीर्ण करना होता है...... उस सिविल की नौकरी छोड़ कर टीम अन्ना का हिस्सा बने अरविंद केजरीवाल व किरण बेदी.... दोनों ही भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा वाले पदो पर थे........ पर उन्होने नौकरी छोड़ कर समाज के प्रति अपने फर्ज़ को महत्व दिया... वास्तव मे हमें राहुल गांधी जैसे नेताओं की आदत हो गई है.... जो गरीब व दलितों की झोपड़ी मे खाना खाते हैं... एक रात उनके साथ जमीन पर ही सो जाते हैं.... और सुर्खियां बटोरकर उनको उनके हाल पर मरने के लिए छोड़ देते हैं....... इस लिए जब कोई साफ नियत से हमारे लिए काम करने के लिए आगे आता है तो हम उसको शक की नज़र से देखते हैं..... क्योकि जैसा आदमी खुद होता है वैसा ही वो दूसरे मे खोजता हैं...... तो हम भी खोजते हैं की आखिर जब मैं लोगों के लिए बिना मतलब नहीं लड़ता तो ये क्यों ? जरूर कोई स्वार्थ है..... और हम लग जाते हैं उनही कृत्यों मे....... जनलोकपाल से बड़ा मुद्दा कोई नहीं है..... किरण बेदी, अरविंद केजरीवाल यहाँ तक की खुद अन्ना हज़ारे से भी महत्वपूर्ण मुद्दा जनलोकपाल बिल होना चाहिए था.... पर लोग मुद्दे को हाशिये मे डालने पर लगे हैं...... और ऐसा करने वालों की नियत मे अवश्य ही खोट है........

के द्वारा: Piyush Pant, Haldwani Piyush Pant, Haldwani

कुछ लोग केवल फेस बुक, ट्विटर , इन्टरनेट , मोबाइल एस एम् एस के बल पर आन्दोलन चला कर इस देश की साधारण/ गरीब जनता को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर " जन लोकपाल " नामक झुनझुना दिखा का जनता को तो भ्रमित तो कर सकते है लेकिन कोई विकल्प नहीं दे सकते विकल्प केवल जनता के मत परिवर्तन से ही केवल जनतांत्रिक प्रक्रिया के फलस्वरूप ही आएगा ? आप सभी प्रबुद्ध सज्जन व्यक्तियों से केवल एक प्रश्न है कि क्या अंग्रेजो से आजादी मिलाने के बाद भी हम किसी विदेशी मदद के बिना हम अपना सुधार नहीं कर सकते तो हम पर लानत है ? मेरे प्रश्न को समझने के लिए केवल आपको www.fordfoundation.org/grants/search साईट खोल कर अवलोकन करने का कष्ट करना होगा वस्तुस्तिथि आप के सामने होगी, जब इस देश की गरीब जनता ने दिल खोल कर दान दिया और १२ दिन में ही दो करोड़ अट्ठावन लाख ( २,५८,००,०००/-) रुपया अन्ना की झोली में ड़ाल दिया फिर विदेशी पैसा लेने का औचित्य आप ही बता दो क्या यह देश सेवा है या कुछ लोग जनता को भ्रमित कर अपना उल्लू सीधा कर रहे है ? सर्वेश्री मनीष सिसोदिया और अरविन्द केजरीवाल की संस्था है "कबीर" जिसको अमेरिकी फोर्ड फाउन्डेसन की ओर पिछले वर्षों में करोडो रुपया इस निर्देश के साथ मिला है कि उनकी संस्था भारत, नेपाल और श्रीलंका में पारदर्शी, उत्तरदायी एवं सक्षम सरकार की स्थापना के लिए कार्य करे " अगर यह देश भक्ति का कार्य है तो फिर देश द्रोह किसको कहते है माना कि श्री अन्ना हजारे एक निर्मल हृदय देश भक्त इंसान है जो भारत में फैले हुए भ्रष्टाचार को समाप्त करना चाहते है तो उनके चेलों को विदेशी पैसे कि दरकार क्योंकर है ? देश, समाज में स्वच्छता आये इसका कोई विरोध नहीं कर सकता और अगर कोई विरोध करता है तो वह पापी है , लिकिन अंध भक्त होना उससे भी बड़ा पाप है ? इस लिए देश भक्तों से यही आशा कि जा सकती है कि जब देश के लोग ही सहायता में सब कुछ देने को तैयार है तो विदेशी पैसा क्यों क्या उनकी यह भी किसी प्रकार कि देश भक्ति है ?

के द्वारा:

विकास मेहता जी.... आपके हर लेख से पूर्वाग्रह से ग्रसित होने का ज्ञान सहज ही हो जाता है..... आप बार बार आडवाणी जी को ही विकास पुरुष व ईमानदार व्यक्ति का तमगा देने को तैयार रहते हैं.... आप के सवालों के जवाब से पहले आपसे कुछ सवाल....... 1- उत्तराखंड के भ्रष्टाचार पर आडवाणी चुप क्यों थे...... 2- कर्नाटक मे आडवाणी जी को भ्रष्टाचार क्यों नहीं दिखा...... 3- जिन्ना की तारीफ करने वाले भी आडवाणी थे.... क्या आडवाणी जी पाकिस्तान के आतंकवाद के प्रति अनभिज्ञ थे... 4- आडवाणी जी की रथयात्रा अन्ना के आंदोलन से पूर्व क्यों नही की गई..... क्या भ्रष्टाचार अन्ना के आंदोलन के बाद शुरू हुआ.. अब आपके प्रश्नो के उत्तर...... 1- जहां तक अन्ना के आंदोलन की तारीफ ओबामा के द्वारा किए जाने का प्रश्न है...... तो ये बात हर कोई जानता हैं....... की ये पूरे विश्व का एक मात्र ऐसा आंदोलन था जिससे किसी भी रूप से जुड़ना किसी के लिए भी सम्मान का विषय था..... आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत ने भी अन्ना के आंदोलन की न केवल प्रसंसा की अपितु अपना समर्थन होने की बात भी कही...... तो क्या आपका मानना है की आरएसएस और अमेरिका के बीच कुछ संबंध हैं....... 2- जहां तक आतंकवादियों पर बोलने का प्रश्न है..... तो कब तक और किस किस चीज़ के लिए आप अन्ना की ओर देखेंगे...... आपको आतंकवाद की चिंता है आप बैठें जंतर मंतर पर........ अन्ना अगर उस समय आतंकवाद पर बोलते तो निश्चित ही आप जैसे लोग उनपर पूरी तरह से राजनीति करने के आरोप लगा देते.... क्योकि इससे आपकी राजनीति चलती है..... 3- जहां तक टीम अन्ना के लोगों का प्रश्न है ..... तो आप अपने आपसे ये प्रश्न पूछें की क्यों नहीं आप टीम अन्ना से जुडने के लिए गए...... जब आप गंदगी को हटाने के लिए झाड़ू लेकर सड़क पर नहीं उतरते हैं तो आपको कोई हक नहीं है उन लोगों पर प्रश्न चिन्ह लगाने का जोकि सफाई करने के लिए उतरे हैं..... 4- जहां तक महाराष्ट्र मे उत्तर भारतियों पर हमलों की बात है तो ...... मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ेगा की जिन आडवाणी जी की तारीफ मे आप लगतार गीत गा रहे हैं..... उन्होने भी कोई बयान ऐसा नहीं दिया जिससे की उत्तर भारतियों का कुछ भला हो..... और यहाँ पर उल्लेखनीय बात ये है की मराठी मानुष का मुद्दा आडवाणी जी की सहयोगी पार्टी ही उठती रही है.... 5- जहां तक गांधी जी के मीडिया मे न आने का प्रश्न है ये बेहद ही बचकाना सा लगता है... शायद आपको ये पता हो की दूरदर्शन के किसी भी चैनल ने इस आंदोलन को प्रमुखता नहीं दी........ तो ब्रिटिश मीडिया अपने खिलाफ गांधी को नायक कैसे बनने देगा ये सवाल विचार करने योग्य है। 6- अन्ना के आंदोलन पर जनता के साथ की बात है तो जो राष्ट्रहित की बात सोचते हैं या करते हैं....... वो हर बार अन्ना या किसी भी और के जो निस्वार्थ राष्ट्रहित की बात करेगा उसका साथ देंगे....... 7- जहां तक इन सबके मिलकर काम करने की बात है तो ये बात समझ लें की ये सांझा सरकार चलाने वाली बात नहीं है.... की सब मिलकर एक सरकार बना लें... मेरे लिए राष्ट्रहित प्राथमिक मुद्दा है..... आपके लिए आडवाणी जी का पीएम बनना ..... राहुल गांधी के लिए पीएम का पद.... मोदी जी के लिए पीएम पद........... बहिन जी के लिए दलित वोट बैंक......... सबके अपने प्राथमिकताएं हैं...... गांधी और भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बॉस सब अपने अपने स्तर पर लड़े.... उसी तरह यहाँ पर भी सबके एक होने से केवल समझौते ही होते .... 8- तालिबान का और लोकपाल का संबंध कुछ समझ से परे है....... यदि इस प्रकार की तुलना होगी तो शायद कल आप ये प्रश्न उठाएँ की हम पर कानून थोपे ही क्यों जाते हैं....... क्या ये तालिबान का राज है॥ और जहां तक अन्ना के आरोपों का जवाब न देने की बात है तो आडवाणी जी कौन सा जवाब दे रहे हैं.... वो पीएम पद की अपनी दावेदारी पर कुछ नहीं बोल पाते हैं.... अब श्री राम के प्रति उनका क्या भाव है वो नहीं स्पष्ट कर पाते हैं.... मोदी पीएम बनेगे की नहीं उनको पता नहीं है...... ये क्या है... 9- अन्ना ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाई है और उन्होने ये मुद्दा गाँव गाँव तक पहुंचाया है........ पर आडवानी जी की रथ यात्रा उनही स्थानो पर जा रही है जहां रथ जाने लायक सड़कें हैं...... अन्ना नहीं कह रहे की मुझे पीएम बनना है ..... पर पीएम पद का ख्वाब देखने वाले आडवाणी जी को ये शोभा नहीं देता........ विकास जी आपको एक छोटी सी राय देना चाहता हूँ...... कृपया कर अपनी सोच का दायरा आडवाणी जी से ऊपर उठाएँ....... जब तक आपकी आँखों मे किसी की भक्ति की पट्टी बंधी है..... आप हर चीज को उसकी कमियों के साथ ही देखेंगे...... और इस पूर्वाग्रह से ग्रसित मानसिकता के चलते आपके लेखों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है......... हर बार आडवाणी जी का पक्ष और अन्ना की खिलाफत के चलते कहीं ऐसा न हो की दिग्विजय सिंह की तरह आपको भी लोग गंभीरता से लेना छोड़ दें......

के द्वारा: Piyush Pant, Haldwani Piyush Pant, Haldwani

भैय्या जी आधे अधूरे लोकपाल या अन्ना और उनके चेलों के द्वारा भरष्टाचार का भूत नहीं भगाया जा सकता यह भूत तभी भागेगा जब इस देश का प्रत्येक नागरिक, बूढा-जवान-यूथ-लड़की- लड़का,औरत सभी यह सपथ ले की न तो रिश्वत लेंगे और न ही रिश्वत देंगे तब ही भ्रष्टाचार समाप्त हो सकता है केवल भाषण और आन्दोलन से कुछ नहीं होगा / जिस प्रकार एक बाबा का प्रचार का माध्यम है " सब का मालिक एक " उसी प्रकार से इन सब के पीछे भी एक मालिक है अमेरिका जहाँ से अन्ना के चेलों के अलग अलग एन० जी ०ओ० को करोडो की मदद केवल भारत ही नहीं श्री लंका और नेपाल में "पारदर्शी - उत्तरदायी - सक्षम" सरकार की स्थापना के लिए इनको मदद मिलती है - तो यह लोग तो उस समय तक हल्ला मचाएंगे जब तक इनका मास्टर कहेगा ?

के द्वारा: gareebdass gareebdass

भाई विकास जी..... आप किसे मीडिया के सहयोग से बना जन नेता मानते हैं ये मैं समझ नहीं पाया...... राहुल गांधी को...... लाल कृष्ण आडवाणी को..... नरेंद्र मोदी को ........ या फिर अन्ना हज़ारे को...... अगर मीडिया किसी को जन नेता बना सकता तो आज राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी से घबराने के जरूरत नहीं होती..... क्योकि ये मीडिया दलित की झोपड़ी से लेकर बाइक की सवारी की खबरें तो बढ़ा चड़ा कर पेश करता है पर ये नहीं बताता की किस तरह जब जब राष्ट्र हित की बात आई है तो राहुल बाबा को साँप सूंघ जाता है..... उन्होने कभी ये नहीं बताया की इन गरीब और दलितों के लिए राहुल बाबा ने क्या योजनाए दी हैं......... अगर मीडिया किसी को जननेता बना सकता तो बाजपई जी के शाइनिंग इंडिया ने उन्हें फिर प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचा देना था....... नेता बनने के लिए महनेत करने की जरूरत नहीं होती ......... जरूरत होती है तो सिर्फ एक साफ नियत और देश प्रेम की भावना की....... जो अन्ना और उनकी टीम मे है....... और इसी लिए जनता ने सब कुछ भूल कर उनका साथ दिया है........

के द्वारा: Piyush Pant, Haldwani Piyush Pant, Haldwani

विकास जी नमस्कार, बहुत अच्छी बात है आप अपने मन की भड़ास निकाली मगर अपने ही मन से पूछिये की क्या आप सच बोल रहे हैं? आतंक ,भ्रष्टाचार , महंगाई,धर्मान्त्र्ण जैसे मुद्दे क्या अन्ना कोई राजनैतिक पार्टी चला रहे हैं? इन सब मुद्दों से लड़ने का काम राजनैतिक पार्टियों का है. अन्ना जिस मुद्दे पर लड़ रहे हैं ये सारे मुद्दे उसमे समाहित हैं. फिर शायाद आपने महाभारत में अर्जुन के निशाने वाली कथा अवश्य ही पढ़ी होगी या तो बच्चन जी की मधुशाला की वो पंक्तियाँ अवश्य ही सुनी होगी "राह पकड़ तू एक चला चल पा जाएगा मधुशाला." हमेशा जिस काम के लिए हम घर से चले हैं उस पर ही हमारा ध्यान केन्द्रित होना चाहिए. वरना कोई भी काम ठीक से नहीं हो पायेगा. रही छवि की बात तो मीडिया ने सिर्फ उनकी बातों को जन जन तक पहुंचाने का काम किया है और उनकी बातें सही नहीं होती तो जनता उनको कब का नकार चुकी होती.आपने देखा ही होगा की प्रशांत भूषण की छवि में कैसे अंतर आया है. कृपया पुनः विचार करें.

के द्वारा: akraktale akraktale

सुब्रह्मण्यम स्वामी ने जो काम अकेले किया है, वह पूरा विपक्ष नहीं कर सका. भारतीय जनता पार्टी मनमोहन सिंह सरकार के ख़िला़फ एक सशक्त विपक्ष की भूमिका नहीं निभा सकी. भ्रष्टाचार के जितने भी मामले सामने आए, उन्हें विपक्ष ने नहीं उठाया, बल्कि उन घोटालों का पर्दाफाश मीडिया ने किया. देश में 2-जी, कॉमनवेल्थ, सत्यम और आदर्श सोसायटी जैसे कई घोटाले सामने आने के बाद ही विपक्ष ने उन्हें मुद्दा बनाया. हैरानी इस बात की है कि इन घोटालों को लेकर भारतीय जनता पार्टी स़िर्फ संसद के अंदर हंगामा करती रही, विपक्ष न तो किसी मंत्री का इस्ती़फा ले सका और न कोई देशव्यापी आंदोलन छेड़ सका. देश में आज भ्रष्टाचार के ख़िला़फ जो माहौल बना है, उसके पीछे बाबा रामदेव, अन्ना हजारे और सुब्रह्मण्यम स्वामी का हाथ है. सुब्रह्मण्यम स्वामी अगर अदालत का दरवाज़ा न खटखटाते तो आज 2-जी घोटाले के सारे आरोपी पहले की तरह चैन से अपना-अपना काम कर रहे होते. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने जो काम अकेले किया, वह पूरी भारतीय जनता पार्टी नहीं कर सकी.

के द्वारा:

आपकी बात से सहमत हु लेकिन बाबा रामदेव और अन्ना (बाबा की तुलना में काफी कम) ने जनजागरण का काम किया है मिडिया ने बाबा को रति भर सहयोग नही दिया जबकि अन्ना के साथ हरदम होती है क्योकि अन्ना MNC कम्पनियों और अमेरिका चाइना का विरोध नही करते लेकिन उनकी टीम ने जन लोकपाल जेसा महत्वपूर्ण विकल्प रखा ,सुब्रमणियम स्वामि पर किसी को संदेह नही है भाजपा को मजबूरी में इनका समर्थन करना पड़ता है अगर कोई ये कहता है की काले धन का मुद्दा सबसे पहले अडवानी ने उठाया तो वह अपना वाक्य इस प्रकार सुद्ध क्र ले "काले धन का मुद्दा सबसे पहले अगर किसी नेता ने उठाया तो तो वो अडवानी थे" ये कोई खीर नही, जिसको देश की दशा पर दुःख होता है वही इन मुद्दों को उठाता है -: ॐ बोराणा

के द्वारा:

भारत की जनता की याददास्त बहुत कमजोर है ये आप के कथन से साबित हो जाता है । ----------सभी बीजेपी के नेता अन्ना और बाबा रामदेव की भीड़ और समर्थको को लपकना चाहते थे तब तो आरोप लगने लाजिमी ही थे चुकी वे लोग बैठे -बैठाए ही बिन पकाए ही खीर खाने के सपने देख रहे थे .---------------- पहले ये बताईए भ्रष्टाचार के विरूध्ध लडना खीर है ? अगर है तो दुनिया का हर धर्म ये पकाता है । बी.जे.पी और वामपंथियोने भी ईसे पकाने के लिये संसद का एक पूरा सत्र दाव पर लगा दिया था । उन के ईस प्रयत्नो को लोगोने खारिज कर दिया था कहने लगे थे -- ये लोग संसद चलने नही देते हैं ।-- लेकिन सुब्रमणियम स्वामि जाग गये । उन्होंने कोर्ट को जगाया । कोर्ट्ने मामला अपने हाथों में लिया, तब जा कर सब नेतागण जेल में जाने लगे । अन्ना या रामदेव का कोइ रोल नही था । अन्ना अगर कहे की ये मेरी खिचडी है कोइ और हडपना चाहता है तो वो अन्ना नही है । ये बात रामदेव कहे तो वो रामदेव नही है । जब कोई लेखक ईसे कोइ उपमा देना चाहता है तब तक ठीक है अगर सिरियसली वो खिचडी ही मानता है तो वो भारत की जनता का प्रतिनीधी नही है । भ्रष्टाचारियों का पेइड पत्रकार है ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

नमस्कार , आप नही जानते की आडवानी जी की इस रथ यात्रा से भाजपा को कितना बड़ा नुकसान हो रहा है , भाजपा कई ग्रुपों में बंट गयी है भ्रस्टाचार के खिलाफ जो माहोल बाबा रामदेव बना रहे है ये ( माननीय अन्ना ग्रुप , आडवानी जी , मिडिया ) सब इसको मिटने में तुले है , संघ का स्वयंसेवक रहकर भी कई बाते मेने अभी सीखी है या पहली बार अच्छे से समजी है जबकि स्वयसेवक देश के मामलो में कितने पारंगत होते है, ये यात्रा बीजेपी कई नही आडवानी की है, भाजपा एक बिना धार का विपक्ष है, आडवानी को अब अटल जी की तरह सन्याश ले लेना चाहिए, अगर उन्होंने अब भी पी ऍम पद के सपने देखे तो इतने गोतालो के बाद भी यु पी ए ३ निश्चित है -: ॐ बोराणा

के द्वारा:

वैसे टीम अन्ना को जिस तरह वेदिशी मीडिया ने प्रोमोट किया, उन्हें विदेशी कंपनियों से आन्दोलन में सहायता मिली, यहाँ तक की उन लोगो का NGO भी विदेशी कंपनियां चलती है, RTI एक्टिविस्टों को भी ये कंपनियां खूब पैसा देती है, जाहिर है वे सरकारी तंत्र को अपने मुठ्ठी में करना चाहती है... लेकिन बाबा का साथ कोई विदेशी कंपनी नहीं देती, क्योंकि बाबा तो खुद स्वदेशी को अपनाकर विदेशियों को यहाँ से खदेड़ने की बात करते है...इसीलिए मीडिया भी बाबा के खिलाफ हमेशा दुष्प्रचार करने में लगा रहता है क्योंकि बाबा अगर अपने आन्दोलन में सफल हो गया तो फिर वे यहाँ लूट नहीं पाएंगे उनको भागना ही पड़ेगा.... और भारत जैसे एक बड़े बाजार को छोड़कर कोई भी कम्पनी नहीं जाना चाहती, आखिर आगे आने वाली वैश्विक मंदी में भारत का बाजार ही उनके लिए संजीवनी होगा... जय हिंद..

के द्वारा: surendra surendra

भाई विकाश जी शायद आप यह आकलन आपने अनुमान के अनुसार ही किया लगता है क्योंकि कोई साक्ष्य या आंकड़े नहीं दिया गया है मै भी इस विषय में कुछ लिखना चाहता था उसी के लिए कुछ तथ्य एकत्र कर रहा था परन्तु इसी बीच आपकी पोस्ट गई है इस लिए अपने तथ्य इसी में समाहित कर रहा हूँ? सबसे पहली बात तो यह है की भारत जैसा गरीब देश जो अभी अपने पैरों पर खड़े होने की तैयारी कर रहा था की पाकिस्तान और चीन से अनचाहा युद्ध करना पड़ा जब अपन पेट भरने के काबिल हुआ तो यूरोप के देशो की कूदृष्टि का शिकार हो गया - यह लोग कभी नहीं चाहते की भारत अपने पैरो पर खड़ा हो सके, उसी कड़ी में एक अमेरिकी संस्था है फोर्ड foundation जिसका काम है पूरी दुनिया में अमेरिकी हितो की रक्षा करना इसी लिए वह दुनिया भर के लोगो के लिए गरीब देशो की सामाजिक शैक्षिक नागरिक जागरूकता के नाम पर NGO बड़े बड़े दान देता है भारत में चलाये गये RTI आन्दोलन के लिए भी फॉर फाउन्डेसन ने बहुत सहायता की थी इसी कड़ी में "कबीर" नमक एक NGO जिसकी श्री मनीष सिसोदिया और अरविन्द कजरीवाल मिल कर चलाते, फोर्ड फाउन्डेसन ने वर्ष २००८, २००९ और २०११ में क्रमश एक लाख सत्तर हजार, (१७००००) एक लाख सत्तानवे हजार (१९७०००) और दो लाख (२०००००) अमेरिकी डालर की सहायता की है जो लभग ६,००,००,०००/- भारतीय रूपये के बराबर होते है , जिसका उद्देश्य है भारत, नेपाल और श्री लंका रीजन में Transprent effective and accountable Government की स्थापना के लिए कार्य करना Kabir 2011 $200,000 India, Nepal and Sri Lanka Promoting Transparent, ffective and Accountable Government Network Building and कोन्वेनिंग. यह एक्सट्रेक्ट फोर्ड फाउन्डेसन की वेब साईट से लिया गया है www.fordfoundation.org/grants/search. अब यह तो मनीष सिसोदिया या अरविन्द केजरीवाल ही बता सकते है की उन्होंने नेपाल और श्रीलंका में कितना कार्य किया और भारत में जो कार्य किया है उसमे से कितना कार्य भारत सरकार के कार्यालयों की ट्रांस्पेरिसी की सहायता के लिए किया है या भारत सरकार की जड़ खोदने में किया है ? वैसे भी कथित सिविल सोसाइटी या स्वयं सेवी संस्थाओं का कार्य सरकार की सहायता करना ही होता है न की किसी सरकार को उखाड़ने की लिए कार्य करना ? लेकिन अगर जो आका इनको पैसा देते है वह जो कार्य चाहे करवा ले / इस लिए आपका कथन की सही भी हो सकता है क्योंकि अन्ना को आन्दोलन जो की इस देश से भ्रष्टाचार के विरुद्ध था वह अचानक से सरकार विरोधी हो गया है ? भरष्टाचार से लड़ने के लिए हर भारतीय उठ खड़ा हो गया था और इस आन्दोलन से चाहे सरकार जाय या पार्टी ख़तम हो किसी को कोई एतराज नहीं हो सकता / परन्तु अन्ना को उपयोग करने वाले ये लोग अपने मकसद में कामयाब हो गए और सरकार विरोधी सुर अलापने लगे जिस कारण अन्ना का भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाया गया आन्दोलन अपने चर्म-बिंदु से लौट कर कही निचे न आ जाय ?

के द्वारा:

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये . . . . . अगर आडवानी संघ के खे अनुसार इस्तीफा देकर देश में अन्ना से पहले रथयात्रा निकलते तो सायद वो प्रधानमंत्री बन गये होते , पर उनको ये तभी यद् आया जब उनके नजदीकी लोगो को जेल हुई , अडवानी को राजनीती नही राष्ट्रनिति करनी चाहिए जो वो कभी किया करते थे , भाजपा मै उपर के नेता सही है निचे वाले तो भ्रष्ट ही है , संघ नही होता तो भाजपा कांग्रेस से भी ज्यादा भ्रष्ट होती , भाजपा को वोट देना हमारी मजबूरी है पसंद नही क्योकि हमे विस्वाश है संघ के रहते वो देशद्रोह , हिन्दू उत्पीडन , खराब विदेश निति , महंगाई और आतंकवाद इनसे तो निजाद दिलवा ही देगी , हमे ये पता है अडवानी या भाजपा न तो कला धन वापस लाएगी और न ही भ्रस्टाचार मिटाएगी हा मोदी होते तो ये भी होने की उम्मीद जगेगी - ओम बोराणा

के द्वारा:

विकास जी नमस्कार, हिन्दू संस्कृति मिलजुल कर रहने में विशवास करती है. फिर क्यों किसी मस्जिद या चर्च को तोड़ेगी.भगवन मस्जिद में हो या गुरद्वारे में हमारा शीश वहां झुकेगा ही. धर्म परिवर्तन गरीबों का हिन्दू से इसाई बन जाना और धर्म परिवर्तन एक से अधिक शादी करने वाले का हिन्दू से मुसलमान बन जाना. सिर्फ यही हिन्दुओं की भावना पर चोट है. किन्तु क्या इसके लिए कोई धर्म दोषी है? दोषी अगर कोई है तो हमारी सरकार या हम खुद.ऐसे बहुत कम ही होता है जब एक से अधिक शादी करना आवश्यक होता है अन्यथा तो पुरुष के गलत चरित्र का ही नतीजा है दूसरी शादी.फिर कोई धर्म दोषी क्यों? फिर हमारे देश में गरीबों की दुर्दशा क्या किसी से छिपी है.यदि सरकार मदत नहीं करेगी खाने से ज्यादा दुःख बीमारियों में अस्पतालों की सुविधाओं का अभाव होना है. इस बात को सरकार या हमारी हिन्दू सामाजिक संस्थाएं नहीं समझ पा रही जबकि इसाई संस्थाएं इसी का लाभ ले कर अपनी संख्या बढाने में जुटी हैं तो फिर गलत क्या है? हम अपनी गलतियों का दोष दूसरों पर नहीं दाल सकते. धन्यवाद.

के द्वारा: akraktale akraktale

के द्वारा: सौरभ के.स्वतंत्र सौरभ के.स्वतंत्र

भाई आपका टाईटल ही गलत है । सब रथयात्रा रथयात्रा केह रहे तो आप भी ---- भाई घोडा ही नही रहा तो कैसी घडागाडी और कैसा रथ । ईसे बसयात्रा कहो । ज्यादासे ज्यादा लक्जरी बस यात्रा केह सकते हैं । अब चुनव सर पे है तो पदयात्रा,सायकल यात्रा, कार यात्रा, कई यात्रा निकलेगी । यात्री के नाम से भी यात्रा निकलेगी । एक नही अनेक । रहुल यात्रा, मुलायम यात्रा, माया यात्रा, कल्याण यात्रा, अन्ना यात्रा, बाबा यात्रा, मोदी यात्रा । आप सही केहते हो भ्रष्टाचार का मुद्दा किसी एक का नही है । विश्वके हर धर्म ने उसे सदीयों से उठा रख्खा है । अन्नाने और बाबाने उस पर जोर दिया है ईतना ही है । ईस से ईस मुद्दे पर किसी का कोपी राइट नही हो जाता । ईस कोपी राइट पर भी जनता बंट गई है वो नादानी है ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

बन्धु ये वो चिडिया है जो ईन सब को प्रेरणा देती हैं, पैसा भी देती हैं और हथियार भी देती हैं । रोकने का तो नाटक ही होता है । आज दुनिया मे ४००० से ज्यादा धर्म है । ईन सब की गीट पीट से चिडिया तंग आ गई है । सब धर्म का नाश करना चाहती है । उसे तो कोइ धर्म ही नही चाहिये । हां, अगर चर्च वाला बच जाये तो एतराज नही । अपने घरमें देख लो, दिवाली की सफाई हो रही है ना । उसी तरह चिडिया भी सफाई करना चाहती है । उसे जो जो चीज रद्दी लगे वो घर के बाहर करेगी । घर को नये सिरे से सजायेगी । ईस चिडिया का अपना कोइ स्वार्थ भी नही, वो तो सपना पूरा किये बीना ही मर जायेगी, लेकिन उस की आनेवाली पिढियां सरलता से जी सके ऐसा वो प्रबंध करना चाहती है । उसे लगता की आबादी बहुत बढ गई है ६ अरब की आबादी कुछ ज्यादा है, कमसे कम दो अरब कम करना है । ईस लिये वो शादी की प्रथा ही तोड रही है, पुरुष को पुरुष के साथ और स्त्री को स्त्री के साथ शादी करवा रही है जीस से बच्चे पैदा न हो । बिना शादी अकेले रेहने की फेशन करवा रही है । कुछ धर्म-जाति की प्रजा को तो वो रद्दी ही समजी है । ऐसी प्रजा तो खूद अपनी ही भार से दब जायेगी,आपसी दंगे और आतंकवाद की आग से मरेगी । बस, उसे हवा देते रहना है । पैसा देना पडे तो भी क्या है । पैसे तो ईस हाथ से दो उस हाथ से वसुल कर लो । उसे ये भी लगता है की भुगोल ही सब फसाद की जड है । मेताभाई में रुक जाता हुं । बात ईतनी लंबी है की एक लेख बन सकता है ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

आप को याद होगा की शादी ब्याह मे ढोल वाले को बुलाया जाता था । एक ढोल वाला अपना ढोल जमिन पर रख देता था । बाराति ढोल के उपर पैसे रखते थे । दूसरा ढोलवाला जोर जोर से अपना ढोल बजाता था । रेजोनन्स के कारण जमिन वाला ढोल भी बज उठता था । पैसे नीची गिराया जाता था, और ये एक्स्ट्रा पैसे होते थे जो वो लोग कमा लिया करते थे । भाई नुझे लगता है की ये ढोलवाले ही अब मिडिया कर्मि बन गये हैं, बल्कि उस से भी विशेष । ढोल को आप ज्यादा से ज्यादा दो साईड से बजा सक ते हो । ये तो हर एंगल से बजता है । एक मिडिया को पैसे दो दुसरा अपने आप बज उठता है, शायद उसे भी कुछ मिल जाये । भाई मिडिया तो मिडिया है वो हिन्दु विरोधी य समर्थक नही होता । उसे बजाता कौन है उस के पर आधार है । अब कल की बात लिजिये । कल कोई बजाने वाला नही मिला तो बडी ईज्जत के साथ करवा ४ का चांद लाईव बता रहे थे । करवा ४ का बडा गुणगान किया था ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

मुझे क्या मतलब ये कहना मत / इस धोखे में हमेशा रहना मत क्योंकि ये जलती हुई दीया तेरे घर की है बेवकूफी से फूंकते रहना मत पढ़ने वालों जरा ध्यान देना इस बात को अनदेखी करते रहना मत अगर भारत माँ की सुहाग ना बची तो दूसरों को कुछ कहना मत क्योंकि आप हम खुद है माँ की आँचल को कटने से बचाने वाले और काटने वाले हमारी बेवकूफी पर गौर सब करेंगे और दुनिया बन जायेंगे हँसाने वाले ( परन्तु अब संकल्प ये करना है की अपनी धरती माँ को फिर वही पद पर बैठना है जो कुछ वर्ष पहले बैठी थी / जो हमारी ही गलतियों के वजह से वह पद छीन ली गई थी हमें फिर वापस दिलाना है / ये एक माँ की पुकार है पूरा करना बेटा का पूर्ण अधिकार है / भारत माता की सदा जय हो.... शुभ कामनाये /

के द्वारा:

वास्तव में अधिकतर मिडिया के लोग हिन्दु विरोधी, भारत विरोधी शक्तियों तथा चर्च के टुकड़ों पर पल रहे हैं। हिन्दुत्व का जिक्र होते ही उनके पितर कांप जाते हैं। पहले तो अन्ना जी भी हिन्दुवादी शक्तियों के गुण गाते थे परन्तु उपरोक्त डर से उन्हे  हिन्दु विरोधी सेकुलर होने का दिखावा करना पड़ रहा है। राजनीति ही देश को चलाती है। राजनीति में आने से डर कैसा। अडवानी देशभक्त हैं। यदि महत्वाकांक्षी हों भी तो क्या फरक पड़ता है, यह तो एक गुण है जो सज्जन जनों मे अवश्य ही होना चाहिए। क्या गांधी नेहरू महत्वाकाक्षी नहीं थे। यदि नहीं थे तो गांधी ने नेहरू को चोर दरवाजे से देश पर क्यों थोपा। काश अगर सुभाष व पटेल महत्वाकांक्षी होते तो गांधी नेहरू को दरकिनार कर स्वयं कांग्रेस व देश की बागडोर संभालते। आज देश का यह हश्र तो नहीं होता। जय भारत।

के द्वारा:

आदरणीय ak रक्ताले जी .....नमस्कार .....यदि कश्मीर को अलग कर देने वाली बात निकल दी जाए तो भी उनका ब्यान राष्ट्रहित में नही है जैसा की उन्होंने कहा की सेना को वहा से हटा लेना चाहिए कई बार देखने -सुनने में आता है की कश्मीरी भी आतंकी को जाने -अनजाने पनाह देते है यदि सेना को वहा से हटा लिया गया तो कुप्रचार तेज़ होंगे साथ ही जिस तरह से कश्मीरी ब्राह्मणों को वहा से निकला गया उसी तरह बाकी बचे हिन्दुओ को भी निकाल दिया जायेगा .सेना के होते यह हालत है तो सोचिये सेना को हटाने पर क्या हालत होंगे और दूसरी बात आपकी बात सही है की हमारे फोजियो को जाने गवानी पड़ी इसके लिए सरकर जिम्मेदार है लेकिन प्रशांत भूषण खुद को एक समाज सेवी कहते है लेकिन वह ये कैसी समाज सेवा कर रहे है बेहतर तो तब होता जब वे मुस्लिम आबादी में गरीबी या फिर हिन्दू आबादी में बढ़ते जातिवाद पर कोई बयाँ देते . कश्मीरियों के पुनर्वास पर कोई ब्यान देते .......

के द्वारा:

विकास जी नमस्कार, अवश्य ही जुबान सम्भाल कर उपयोग करना चाहिए क्योंकि हम जानते हैं की बन्दुक से निकली......... नहीं आती. मगर उनके बयान से कश्मीर को अलग कर देने वाली बात निकाल दें तो वह कहीं भी गलत नहीं हैं.अवश्य ही काश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा.किन्तु क्या आपने कभी सोचा की लगातार इतने वर्षों से बंदूकों के साए में जी रहे लोगों की मानसिकता का क्या हाल होगा? क्यों देश की सरकारें आजतक हल नहीं निकाल सकीं? और अब भी कोई तारीख निश्चित है क्या? यदि आपके घर के सामने कोई दो दिन तक लगातार खडा होने लगे तो आप उससे लड़ाई करने लगेंगे की मेरे दरवाजे के सामने मत खड़े होना. किन्तु उनका क्या जिनके दरवाजे ही नहीं घरों में भी जब चाहे फौजी घुस जाते हैं चाहे जिस वक्त किसी को भी थाने बुलवा लेते हैं. और भी बुरी हकीकत है क्या कहूँ. आपको ही नहीं हम सभी भारतवासियों को बहुत दुःख है उन शहीदों के लिए जो कश्मीर में फर्ज निभाते हुए मारे गए. मगर इसका दोषी कौन है? प्रशन भूषण नहीं हमारी सरकारें है जो कभी कोई ठोस कदम उठाती ही नहीं भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई सरकार से कुछ उम्मीद भी नहीं है.वरना तो ओसामा के मारे जाने के दुसरे ही दिन हम दाउअद के मारे जाने का समाचार पढ़ते. इसलिए जो सलाखों के पीछे गए वो जाना ही चाहिए थे. मगर प्रशांत भूषण की भी इस बात के लिए निंदा होनी चाहिए की उनने किस अधिकार से देश के विभाजन की सलाह दे डाली

के द्वारा: akraktale akraktale

भ्रोदिया जी .........यदि हम अन्ना को आतंकवाद पर बोलने एक आन्दोलन करने की अपील करे तो भी आप कहते है हम घसीट रहे है अन्ना को ........ यदि हम कहे की बाबा रामदेव जी ने इस भर्ष्टाचार के मुद्दे को बेहतर ढंग से उठाया तो भी आप आक्रामक हो जाते है ... यदि हम कहे की अन्ना महा राष्ट्र से है और एक गांधीवादी है उन्होंने भारत भ्रष्ट मुक्त का संकल्प लिया है लेकिन उन्ही के महाराष्ट्र में ये हालत है तो भी आप कहते है हर मामले में अन्ना को न घसीटो .......... आखिर आप चाहते क्या है की हम बेवजह ही अन्न को एक राष्ट्रभक्त घोषित कर दे और उन्हें एक हीरो बना दे जैसा भारत में पहले से होता आया है .......... और लेख को आप ध्यान से पढ़े फिर कोई प्रतिक्रिया दे ये लेख अन्ना पर आधारित नही है बल्कि राज ठाकरे और सरकार ,बिहारियों ,और अंत में अन्ना की भी कुछ जिम्मेदारी है भई

के द्वारा:

विकासभाई मायावति, नितिश कुमार और महाराष्ट सरकार, ये सब समजदार है । (१) वो राज ठकरे को हिरो बनाना नही पसंद करेंगे । (२) मायावति, नितिश कुमार के लिये कोइ बयान देना उन के ही विरुध्ध जाता है । माना के नागरिकों को कहीं भी बस ने का अधिकार है । आप का नेता अगर समज दार है तो ये बयान भी नही देगा, उन के लिये तो चुल्लु भर पानी में दूब ने की बात हो जाती है । कोई बडी नौकरी या बडे काम से राज्य छोड कर जाये तो ठीक होता है लेकिन मजदूर जैसे काम के लिये जाना पडे वो तो राज्य के लिये शरम की बात है । नितिशभाई की विकास की बातें हवा हो जाती है । मायाबेहन की भी जो विकास की ऍड हम टी.वी मे देखते थे उसका कोई मतलब नही रेहता । रही बात प्रजा की । धरना देगी, कहा, दिल्लीमें, यु.पी में , बिहार में । राज ठकरे को क्या फरक पडेगा । महाराष्ट मे अगर कुछ किया गया तो राज ठाकरे अकेला नही है । आम जनता भी उस के साथ आ गई है । ईस के कारण भी है । अभी उन का कुछ युनियन का प्रोब्लेम है मुझे मालुम नही क्या है, लेकिन ईस के पेहले की बात बताता हुं । मुम्बई का माहोल शान्त है । सब लोग कामकाजी और शान्ति प्रिय है । रात के १२ बजे भी कोइ लडकी या औरत बिना डर कहीं भी आ जा सकती है । कुछ दिन पेहले रिक्षावालों ने एक लडकी को रिक्षा में खिच के ले गये और बलात्कार कर दिया । दिल्ली टाईप की ये घटना पेहली बार हुई । मुम्बई के लोग नही चाहेंगे की मुंबई दिल्ली बन जाये । लोग पर देश जाता है अपने संस्कार ले के, कुसंकार ले के जायेगा तो मार तो पडेगी, व्यवहार की बात है ना । आप जैसे लेखक, जो बुध्धिजीवी होता है वो ईतना तेवर दिखा सकता है तो वो तो अनपढ है, उन के तेवर की बात और ही होती है ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

amitabh भूषण जी .....आप सही कह रहे है मैंने कहाँ अपनी पोस्ट में लिखा की केवल पुतला दहन था ....... आप निचे लिखे शब्दों को पढ़े .......... इस घटना के बाद सवाल उठता है क्या राज ठाकरे पर सरकार तब तक कारवाई नही करेगी जब तक की बिहारी समाज अपनी परतिकरिया नही देगा ?क्या शान्ति पूर्ण तरीके से सरकार को बात समझ नही आती ? जिस तरह से गुज्जर ,जाटो ने आरक्षण के लिए आन्दोलन किया था वैसे ही अब बिहारी समाज को अपने लोगो की जान बचाने ,सरकार तक अपनी आवाज पहुचाने के लिए सड़के जाम करनी होंगी ,रेल रोकनी होगी या फिर सरकार इस तरह की घटना होने से पहले ही राज पर कारवाई करेगी ? मित्रो ,कल की यह घटना तो सरकार और राज को एक चेतावनी थी सरकार ने तुरंत कोई कदम नही उठाया तो इस चिंगारी से आग लगते देर नही लगेगी .शायद हो सकता है हमारे भारत के हर राज्य में क्षेत्रवाद की आग लग जाए क्या सरकार एसा चाहती है .एसा हुआ तो उसका नुक्सान भोगना पड़ेगा ,भारत की गरीब जनता को .इसलिए सरकार को तुरंत राज पर करवाई कर उसे तिहाड़ या फिर किसी और जेल में बंद कर देना चाहिए .

के द्वारा: vikasmehta vikasmehta

मित्र विकास जी संभव हो तो अपने लेख की जानकारियों को दुरुस्त कर ले ...यह केवल तस्वीर दहन नहीं था ..पुतला दहन था .. नई दिल्ली , ६ अक्टूबर , उत्तरभारतीयो पर मुंबई में जारी हमलों के खिलाफ युवा बिहार फाउंडेशन ने विजयादशमी के अवसर पर महाराष्ट्र नपुंसक सेना के खलनायक राज ठाकरे का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया .. .राज ठाकरे हाय हाय ,महाराष्ट्र सरकार होश में आओ , मनसे की गुंडागर्दी बंद करो का नारे लगाते जंतर मंतर पहुचे युवाओ ने राज ठाकरे और महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा की समय रहते सुधर जाओ , नहीं तो ईंट का जबाब पत्थर से दिया जायेगा .. महाराष्ट्र नपुंसक सेना और शिव सेना के लोग उत्तर भारतीयों के पुरुषार्थ को ना ललकारे नहीं तो सर्वनाश होगा ... मुंबई को अपनी बपौती समझाने वाले लोग भारतीये लोकतंत्र के चिरहरण का प्रयास ना करे मुंबई किसी की जागीर नहीं है, मनसे वाले अपना मानसिक इलाज़ जल्दी करवाए .. मुम्बई उत्तर भारत की विस्तार शाखा है ..इस सत्य को जितनी जल्दी ठाकरे खानदान समझ ले ,उनके लिए बेहतर होगा . .मनसे के सामने नतमस्तक महाराष्ट्र सरकार को आड़े लेते हुए युवाओ ने कहा की क्या महाराष्ट्र की ठेकेदारी सड़क छाप राज ठाकरे और उनके गुंडों के जिम्मे है ? वक्ताओ ने राज ठाकरे के गुंडागर्दी पर मौन धारण किये समाजसेवी अन्ना हजारे को आड़े हाथो लेते हुए कहा की क्या अन्ना हजारे मौन व्रत पर है ? क्या अन्ना हजारे को मुंबई में मनसे के गुंडों की गुंडागर्दी और पिट रहे निर्दोष ऑटो चालक आम उत्तर भारतीये की तकलीफ नहीं दिख रही है| भ्रष्टाचार मुक्त भारत की बात करने वाले अन्ना हजारे का मनसे को मौन समर्थन कैसा भारत बनाने का प्रयास है ...अन्ना देश को जबाब दें .... इस कार्यकम में युवा बिहार के अध्यक्ष दीनबंधु सिंह,सचिव सह प्रवक्ता अमिताभ भूषण ,कोषाध्यक्ष विशाल तिवारी सह सचिव मृगांक विभू , फ़िल्मकार भावेश नंदन झा , समाज सेवी कुंदन कुमार झा ,सुशील कुमार , केशव कुमार आशीष कुमार , आदित्य कुमार समेत दर्जनों छात्र उपस्थित थे |

के द्वारा:

बहुप्रतिक्छित राष्ट्रपती महात्मा अन्ना हजारे......................... कांग्रेस के वजूद को भारत में २०१४ के बाद यदि कोई जिन्दा रख सकता है, तो वो है, महात्मा अन्ना हजारे, और अन्ना हजारे एसा करेगे, ब्यक्तित्ववाद हमेसा राष्ट्रवाद को हराया है, इतिहास में अंग्रेजो से "सर" की उपाधि प्राप्त रविन्द्रनाथ ठाकुर हो या, रविन्द्रनाथ से "महात्मा" के उपाधिस्थ महात्मा गाँधी कोई भी ब्यक्तित्ववाद के मोह से बच नहीं पाया, महात्मा अन्ना हजारे को भी काला धन, भ्रष्टाचार, दरिद्रता, भूक, गरीबी, अन्याय, ब्यवस्था परिवर्तन जैसे मुद्दों से कोई मतलब नहीं है उन्हें तो देस का अगला राष्ट्रपती बनना है और कांग्रेस बखूबी अपना वादा निभा सकती है www.rajivdixit.com

के द्वारा: surendra surendra

के द्वारा: akraktale akraktale

विकास जी, दो भिन्न बिन्दुओं को समेटे आपका संक्षिप्त किन्तु सराहनीय लेख। आदरणीय भरोदिया जी, चीन में यदि लाखों कुत्ते या अन्य प्राणी एक दिन में मार दिये जाते हैं तो हम उसका वैचारिक विरोध अवश्य कर सकते हैं ताकि ऐसे क्रियाकलाप हमारे यहाँ संक्रमित न हों। लड्डू और प्राणी में अंतर तो है ही किन्तु यहाँ उसकी चर्चा न करके इतना आपको बताना चाहता हूँ कि मांसाहार के समर्थन में आपके द्वारा दिये गए सीमित पैदावार के चलताऊ तर्क का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। क्या आपने विश्व के अन्यान्य देशों में होने वाली कृषि उपज, खपत, व आयात निर्यात के आंकड़ों का अध्ययन किया है जिस आधार पर आप कह सकें कि धरती की कोख में विश्व आबादी को तृप्त करने भर की उपज की सामर्थ्य नहीं है? विस्तार में विवेचन यहाँ न कर के अभी इतना ही बताना चाहूँगा कि विश्व की कुल वर्तमान जनसंख्या की आवश्यकता का 6गुना अन्न आज यह धरती पैदा कर रही है। फिर भी कई स्थानों पर भुखमरी क्यों? संभव है यह प्रश्न आपके मन में गूँजे, इसके लिए विश्व परिस्थितियों, नीतियों, राजनीति, व अर्थव्यवस्था के कई पहलुओं को आपको समझना होगा। मेरा प्रयास मात्र अभी इतना कहना था कि मांसाहार का समर्थन वह भी वर्तमान की वातावर्णिक परिस्थितियों में और फिर भारत जैसे कृषि सम्पन्न देश में किसी भी दृष्टि से तार्किक नहीं कहा जा सकता यदि हम सभ्य शिक्षित समाज की बात करे......

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आदरणीय s p singh जी| देर से प्रतिक्रिया के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ|मुझे यह पता नहीं था की टिप्पडी अनुरोध करके मंगाई गयी है|नाहक ही मेरे हाँथ की बोर्ड पर मचल उठे|मेरा इरादा आपको कहीं से भी आहत करने का नहीं था किन्तु मात्र एक छोटा सा आरोप लगाकर यह कह देना की अमेरिका कांग्रेस के इसलिए विरुद्ध हो गया क्योंकि कांग्रेस के लोगों ने फाईटर प्लेन खरीदने की अनुमति नहीं दी क्या आपको बचकाना नहीं लगता? और क्या प्रमाण है आपके पास की अमेरिका कांग्रेस के विरुद्ध है? भाजपा वाले पाकिस्तान से लड़ना ही चाहते हैं...यह किसने कह दिया? वास्तविकता यह है की भारत के पास भूटान तक से मात्र तीन माह भी युद्ध लड़ने की कूबत नहीं है|युद्ध मात्र हथियारों से नहीं लड़ा जाता महोदय...सन ४७ वाली स्थिति गयी|हमने अपने बीच कितने विदेशियों को पाल रखा है ...क्या यह भी आपको बताना पड़ेगा? आप ही बताईये विश्व मंच पर भारत के पास है ही क्या? नेहरु की पिट्ठूओं ने आखिर छोड़ भी क्या रखा है हमारे पास? एक बात और भारत का अर्ध इस्लामीकरण और इसाईकरण हो चूका है...ऐसी स्थिति में नरेंद्र मोदी के प्रधान मंत्री बनने की दूर दूर तक कोई संभावना नहीं|मैं भविष्यवाणी नहीं करता...वर्तमान में जीता हूँ और वर्तमान की बात आपको बता रहा हूँ|आपको बुरा लगा...इसका मुझे खेद है ....वन्देमातरम

के द्वारा: atharvavedamanoj atharvavedamanoj

bhaai atharvaved manoj आपकी टिपण्णी के लिए धन्यवाद शब्द तो कुछ छोटा लग रहा है आप ही बता दे की आपको किस प्रकार का धन्यवाद पसंद है वैसे मैंने कोई इस विषय में कोई पोस्ट नहीं लिखी थी केवल श्री विकाश मेहता की पोस्ट पर उनके द्वारा की गई प्रार्थना पर ही कमेंट्स किया है इसमें आपको व्यंगात्मक टिप्पणी का क्या ओचित्य है मै तो बिलकुल ही नहीं समझ पाया, लगता है की आप इतने विद्वान है की दूसरो की बात को उपहास में उढ़ाने की आपको आदत पड़ गई है या फिर आपके नजरिये में ही कोई दोष है जिसमे केवल एक ही डिग्री से दीखता है जिस प्रकार से बारिश के मौशम में एक प्राणी इस कारन से फिकर में दुबला हो जाता है कि उसने अभी कुछ खाया ही नहीं क्योंकि वह जिस और भी देखता है उसे चारो और हरियाली हरियाली ही दिखती है हरियाली के अतिरिक्त उसे कुछ नहीं दीखता और वह खाना खाने के बाद भी भूखा ही महशूस करता है ? टिपण्णी के लिए धन्यवाद.

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भाई विकास मेहता जी, आपका अनुमान कुछ सही प्रतीत होता है यह वही अमेरिका है जिसने अब से पांच वर्ष पहले अपनी जमीन पर मोदी को पैर रखने से मना कर दिया था यानि कि मोदी को अपने देश में एंट्री वीजा नहीं दिया था और तब कहा था कि मोदी का मानवाधिकार का रिकार्ड सही नहीं है हम ऐसे व्यक्ति को अपने देश में कदम भी रखने नहीं देंगे. आज वही मोदी अमेरिका के चहेते होने जा रहे है और मोदी भी फुले नहीं समां रहे हैं - क्योंकि यह पूरा युनिवर्ष जानता है कि अमेरिका जिस पर भी हाथ रख देता है वही आगे चल कर सत्ताधीश बनता है ? चूँकि कि कांग्रेस के लोगों ने अमेरिका से फ़ौज के लिए खरीदे जाने वाले फाइटर प्लेन की अनुमति नहीं दी इस लिए अमेरिका चाहता है कि अब कांग्रेस को भारत से सत्ताच्युत कर दिया जाय और यह सब बी जे पी कि मदद के बिना हो ही नहीं सकता . इस लिए मोदी कि तारीफ़ के पुल बांधे जा रहे है? जो सत्ता परिवर्तन के लिए तो ठीक प्रतीत होता है परन्तु यह देश के लिए कालांतर में घातक ही होगा, एसपीसिंह

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यदि हम यहाँ पर अपनी दृष्टि को बदल कर दूर पक्ष देखे तो अन्ना का आन्दोलन कांग्रेस प्रायोजित भी लगता है. क्योकि अन्ना के आन्दोलन से कांग्रेस को लाभ हुआ है. क्यकी अन्ना के आन्दोलन से पूर्व स्वामी रामदेव जी का कालाधन आन्दोलन भी चरम पर था और यदि उनका आन्दोलन सफल होता तो कई बड़े बड़े राजनीतिक धुरंधर के गले क़ानून से शिकंजे में फसने वाले थे. विकीलीक्स के खुलासे वाली लिस्ट में स्विस बैंक में जिन खाताधारको के नाम है उनमे अधिकतर नेता राजनीति में आज भी ख़ास स्थिति रखते है. स्वामी रामदेव के आन्दोलन रुपी एटम बोम्ब फूटने को रोकने के लिए इन्होने अन्ना का लोकपाल रूपी फुलझड़ी का प्रयोग किया. यदि स्वामी रामदेव जी का कालाधन वापस लाओ आन्दूलन पूर्ण हो जाए तो देश को बहुत बड़ा लाभ होगा. उस धन से देश का सम्पूर्ण कर्ज एक साथ उतर तो जाएगा ही. उसके पश्चात भी एक बहुत बड़ी धनराशी देश हित में काम आएगी.

के द्वारा: Amar Singh Amar Singh